राष्ट्रमंडल खेल में भ्रष्टाचार पर सरकार की सफ़ाई

राष्ट्रमंडल खेल
Image caption राष्ट्रमंडल खेल के आयोजन को लेकर मीडिया में भ्रष्टाचार की काफ़ी ख़बरें आ रही हैं

दिल्ली में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारी में देरी और भ्रष्टाचार के मु्द्दे पर सोमवार को लोकसभा में लंबी और रोचक बहस हुई.

विपक्ष ने सरकार से आक्रामक और तल्ख़ अंदाज़ में कहा कि वो मीडिया में खेल के आयोजन से जु़ड़े भ्रष्टाचार के मामलों पर साफ़ जवाब दे और फ़ौरन संयुक्त संसदीय समिति से जांच करवाने के आदेश दे.

वहीं सरकार ने कहा कि विपक्षी नेता खेलों पर हुए खर्च और भ्रष्टाचार से जुडे मुद्दों को बढ़ा चढ़ा कर पेश कर रहे हैं, देश की टोपी उछालकर राजनीतिक रोटी भुनाना चाहते हैं.

बहस मूलत तीन बिंदुओं पर हुई- खेलों के आयोजन पर आई लागत, उसमें हुए कथित भ्रष्टाचार के मामलों की जांच कैसे हो और क्या भारत में इन खेलों का औचित्य है.

विपक्ष ने एक सुर में खेल आयोजन में भ्रष्टाचार के मामलों पर सरकार को घेरा.

केंद्रीय सतर्कता विभाग की आरंभिक रिपोर्ट का हवाला देते हुए विपक्ष ने कहा कि खेल के आयोजनों की कीमत कई गुना कैसे बढ गई.

भारतीय जनता पार्टी का पक्ष रखते हुए सांसद कीर्ति आजा़द ने कहा, "नागपुर का क्रिकेट स्टेडियम 90 करोड़ रूपए में बना है और जवाहरलाल नेहरू जैसा नया स्टेडियम 300 करोड़ रूपए में बन सकता है तो फिर जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम के नवीनीकरण और मरम्मत पर 900 करोड़ रूपए कैसे खर्च हो गए."

खर्च का हिसाब

कीर्ति आजा़द ने यह भी पूछा कि शौचालय में इस्तेमाल होने वाले टॉयलेट टिशू पेपर जिसके रोल 30-40 रुपए में मिलते हैं उन्हें चार हज़ार रूपये की कीमत पर कैसे ख़रीदा गया.

सरकार का पक्ष रखते हुए कांग्रेस के सांसद संजय निरुपम ने आरोप लगाया कि विपक्ष लगातार तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर रख रहा है. संजय निरुपम ने कहा कि टॉयलेट टिशू पेपर का एक कार्टन 3700 रूपए में खरीदा गया जिसमे 100 रोल आते हैं तो एक रोल की कीमत 37 रूपए है ना कि 4000 रूपये जैसा विपक्ष आरोप लगा रहा है.

शहरी विकास मंत्री जयपाल रेड्डी और कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने स्टेडियम तैयार करने में हुई देरी के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि 18 में से 17 स्टेडियम तैयार हो चुके हैं.

लेकिन शायद कांग्रेस सांसद खुद भूल गए की दिल्ली सरकार स्वीकार कर चुकी है कि कई स्टेडियम जिन्हें आयोजन समिति को सौपा जा चुका है उनमें अभी काम आगे चलेगा.

वहीं लंदन में क्वीन्स बैटन रिले के खर्च में भ्रष्टाचार पर हालांकि राष्ट्रमंडल आयोजन समिति ने अपने तीन वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित कर दिया है लेकिन कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी का कहना था कि मामूली रक़म थी, लगभग एक करोड रूपए.

साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई इस धांधली में लिप्त पाया जाता है तो उसे कड़ी से कड़ी सजा़ दी जानी चाहिए.

'दावा निराधार'

विपक्ष के कुछ सासंदों ने यह आरोप भी लगाए की राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन की रक़म लगभग एक लाख करोड़ तक पहुंच गई है.

Image caption विपक्ष ने भ्रष्टाचार के मामले की जांच की मांग की है

कांग्रेस ने कहा विपक्ष का यह दावा भी निराधार है.

खेलमंत्री एमएस गिल ने कहा कि खेलों के आयोजन के लिए केंद्र सरकार ने 11494 करोड़ रूपए खर्च किए हैं जबकि खेलों की तैयारी में दिल्ली में ढांचागत सुविधाओं के सुधार और मरम्मत के लिए 16500 करोड़ रूपए दिए गए हैं.

जनता दल यूनाएटेड के अध्यक्ष और सांसद शरद यादव ने खेलों के आयोजन के औचित्य पर ही सवाल उठाते हुए कहा कि जिस प्रकार दिल्ली को खेलों के लिए तैयार करने के लिए 16500 करोड़ रूपए दिए गए वो जायज़ था या मात्र दिखावे की कोशिश.

उन्होंने पूछा कि फ्लाई ओवर सिर्फ दिल्ली में क्यों बन रहे हैं पूरे देश में क्यों नहीं.

लगभग सभी विपक्षी दलों ने एक बात की मांग जम कर की कि राष्ट्रमंडल खेलों में भ्रष्टाचार के मामले की जांच खेलों के आयोजन के बाद नहीं बल्कि फ़ौरन होनी चाहिए और इसे संसद की एक संयुक्त समिति को सौपा जाना चाहिए.

लेकिन सरकार ने अभी तक मोटा मोटी यही आश्वासन दे रही है कि धांधली का दोषी पाए जाने वालों को का़नून के सामने लाया जाएगा.

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