तेल रिसाव रोकने के लिए अभियान

मुंबई के तट से कुछ ही दूरी पर हुए दो जहाज़ों के टक्कर के कारण हुए तेल के रिसाव को रोकने की कोशिशें जारी है.

ये टक्कर मुंबई बंदरगाह से जा रहे एमएससी चित्रा और वहाँ आ रहे एम खलीजिया के बीच शनिवार को सुबह दस बजे के आसपास हुई.

जहाज़ चित्रा को भारी नुक़सान हुआ और उसमें से तेल निकल रहा है.

उसमें रखे कई सौ डिब्बों में से कुछ तो अरब समुद्र में भी गिर गए हैं और जहाज़ डूबने की कगार पर पहुँच गया है.

कोस्टगार्ड के आईजी एसपीएस बसरा ने बीबीसी को बताया कि हर दिन समुद्र में एक टन तेल गिर रहा है और इस जहाज में करीब 2800 टन तेल है जिसमें से 800 टन समुद्र में पहले ही बह चुका है.

उनका कहना है कि गिर रहा तेल फ़रनेस फ़्यूल ऑयल है. बसरा के मुताबिक जहाज़ चित्रा पर करीब 1200 कंटेनर थे जिनमें से करीब 400 समुद्र में गिर चुके हैं.

उनके मुताबिक स्थिति ख़तरनाक नहीं है, हालांकि जहाज़ 60-70 डिग्री तक टेढ़ा है.

उनका कहना था कि उन्हें कोई समस्या नहीं हो रही है और उन्होंने एक अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ कंपनी की मदद ली है और अभी ये कहना संभव नहीं है कि इसे रोकने में कितना समय लग जाएगा.

बसरा का कहना था कि कुछ कंटेनरों में कुछ रसायन थे, लेकिन जहाँ तक उन्हें जानकारी है, ये कंटेनर सुरक्षित हैं.

चिंता

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने स्थिति पर चिंता जताई है.

रक्षा मंत्रालय से आ रही सूचनाओं के मुताबिक जहाज़ एमएससी चित्रा अब भी ख़तरनाक तरीके से झुका हुआ है और स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है.

कई कोस्टगार्ड हेलीकॉप्टर, हवाई जहाज़ और पानी के जहाज़ बहते तेल से निपटने के काम में लगे हुए हैं. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक तेल बहने की रफ़्तार में कमी आई है, लेकिन ये कमी कितनी है इस बारे में विभाग ने स्पष्ट नहीं किया.

मंत्रालय के मुताबिक हवाई सर्वेक्षण किए जा रहे हैं ताकि पता लगाया जा सके कि तेल किन इलाकों में फैला है.

मंत्रालय के मुताबिक बचे हुए गाढ़े तेल के धब्बे भाभा परमाणु केंद्र और शिवड़ी के नज़दीक देखे गए हैं.

रक्षा मंत्रालय का कहना है कि ऐलीफ़ैंटा द्वीप के पास तेल के धब्बों को रसायन के छिड़काव के बाद साफ़ कर दिया गया है.

मंत्रालय के मुताबिक ठाणे, नवी मुंबई और रायगढ के जिलाधिकारियों ने बताया है कि वहाँ की समुद्र सीमा पर कोई तेल के धब्बे नहीं देखे गए हैं. जहाँ भी तेल के धब्बे दिख रहे हैं वहाँ प्रदूषण रोधी रसायनों का छिड़काव किया जा रहा है.

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक तेल से पर्यावरण को ख़तरा है, लेकिन स्थिति नियंत्रण में है.

मछुआरों पर असर

उधर तेल के बहने का सबसे ज़्यादा असर पर्यावरण पर और मछुआरों पर पड़ने का डर है.

नेशनल एसोसिएशन ऑफ़ फ़िशरमैन की महाराष्ट्र इकाई के प्रमुख राजहंस टपके का मानना है कि तेल बहाव का सबसे ज़्यादा असर करीब 10 हज़ार छोटे मछुआरों पर पड़ेगा और उन्हें हर दिन नुकसान के 500 रुपए दिए जाने चाहिए.

उनका कहना है कि तेल मुंबई के काफ़ी नज़दीक तक पहुँच चुका है.

राजहंस टपके के अनुसार उनके साथी मछुआरों का कहना है कि तेल एलीफ़ैंटा द्वीप के आसपास फैला हुआ है, हालांकि सरकारी तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है.

ये मामला सोमवार को राज्यसभा में भी उठा. इस पर पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने कहा कि दोनों जहाज़ों के मालिकों के ख़िलाफ़ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है.

जयराम रमेश ने बताया कि महाराष्ट्र राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जहाज़ के मालिकों के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है.

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