भ्रष्टाचार से लड़ने वालों के लिए कानून

  • 9 अगस्त 2010
Satyendra DUbey
Image caption भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद करने को लेकर सत्येंद्ग दुबे की हत्या कर दी गई थी.

भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के मामले में व्यवस्था के ख़िलाफ बिगुल बजाने वालों की पहचान गोपनीय रखने और उनकी सुरक्षा के लिए कानून बनाने को मंत्रिमंडल ने अपनी मंजूरी दे दी है.

भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वालों की सुरक्षा के लिए कानून बनाने को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता एंव सूचना के अधिकार (आरटीआई) का इस्तेमाल करने वाले लोग काफ़ी समय से सरकार पर दबाव बना रहे थे.

'पब्लिक इंटरेस्ट डिसक्लोज़र एंड प्रोटेक्शन फॉर पर्सन्स मेकिंग डिसक्लोज़र' नामक इस विधेयक को अब संसद में रखा जाएगा. संसद की मंजूरी के बाद ये राष्ट्रपति के पास जाएगा और उनकी सहमति से इसे कानून के रूप में मान्यता मिल जाएगी.

कुछ समय पहले गुजरात में एक आरटीआई कार्यकर्ता अमित जेठवा की हत्या के बाद इस कानून को लेकर मुहिम तेज़ हो गई थी. अमित जेठवा ने रेत के गैरकानूनी ख़नन के मामले में गुजरात के सांसद का पर्दाफ़ाश किया था.

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण में फैले भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद करने वाले सत्येंद्ग दुबे की हत्या के बाद भी इस कानून की मांग को लेकर भारत भर में कार्यकर्ता एकजुट हुए थे. सत्येंद्ग दूबे ने स्वर्णिम चतुर्भुज हाईवे परियोजना में फैले भ्रष्टाचार के ख़िलाफ उच्च अधिकारियों से शिकायत की थी.

इस विधेयक के तहत जनहित में किए गए ख़ुलासों को परिभाषित करते हुए कहा गया है कि 'जनता के लिए इस्तेमाल में आने वाले धन के दुरुपयोग और जनहित के लिए काम करने वाली सरकारी संस्थाओं के घोटालों की जानकारी देने वाले व्यक्ति को ‘व्हिसल ब्लोअर’ माना जाएगा.'

इस बिल के तहत केंद्रीय सतर्कता ब्यूरो (सीवीसी) को अतिरिक्त अधिकार दिए गए हैं. सीवीसी को ये अधिकार होगा कि वो सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार के ख़िलाफ आवाज़ बुलंद करने वालों यानी ‘व्हिसल ब्लोअर्स’ के ख़िलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई को रोक सके.

इस के तहत सूचना देने वाले की पहचान को गोपनीय रखना सीवीसी की ज़िम्मेदारी होगी. ऐसे व्यक्ति की पहचान अगर उजागर होती है तो परिजनों को संबंधित अधिकारियों के ख़िलाफ शिकायत करने का अधिकार है.

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