रविवार से खुलेंगे बंदरगाह, सफ़ाई में 45 दिन

एमएससी चित्रा

केंद्र सरकार का कहना है कि हाल में जहाज़ों की टक्कर के बाद बंद मुंबई बंदरगाह को आगामी रविवार से आवाजाही के लिए खोल दिया जाएगा. उधर पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने कहा है कि समुद्र के प्रभावित क्षेत्र की पूरी सफ़ाई में 45 दिन का वक़्त लगेगा.

पिछले शनिवार मुंबई के तट के पास दो जहाज़ों - एमएससी चित्रा और एमवी खालीजिया की टक्कर के बाद तेल का रिसाव शुरु हो गया था लेकिन अब वह रुक गया है.

जयराम रमेश ने मंगलवार को लोकसभा में बताया कि 15 अगस्त तक बंदरगाह में जहाज़ों की आवाजाही शुरु हो जाएगी लेकिन जहाज़ एमएससी चित्रा से रिसे तेल की पूरी सफ़ाई में क़रीब डेढ़ महीने का वक़्त लगेगा.

मुंबई पोर्ट ट्रस्ट के चेयरमैन राहुल अस्थाना ने भी भरोसा दिलाया है कि टकराव के बाद आने वाले रविवार को बंदरगाहों में काम शुरू हो जाएगा.

अठारह जहाज़ फँसे

मुंबई में दो जहाज़ों में हुए टकराव के कारण समुद्र में कंटेनर बिखर गए थे जिसकी वजह से मुंबई पोर्ट ट्रस्ट बंदरगाह और जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (जेएनपीटी) बंदरगाह में से जहाज़ों की आवाजाही रोक दी गई थी.

मुंबई पोर्ट ट्रस्ट के चेयरमैन राहुल अस्थाना ने बीबीसी को बताया है कि इस वजह से मुंबई बंदरगाह को हर रोज़ तीन से चार करोड़ का औऱ जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (जेएनपीटी) बंदरगाह को इससे थोड़े ज़्यादा का आर्थिक नुकसान हो रहा है.

समस्या ये है कि क्षतिग्रस्त हुए जहाज़ चित्रा में रखे कंटेनर तैरते हुए इन बंदरगाहों तक पहुँच गए हैं जिससे जहाज़ों की आवाजाही रोक दी गई थी और इस वजह से हुए आर्थिक नुकसान को लेकर चिंता जताई जा रही है.

अस्थाना के मुताबिक दोनों ही बंदरगाहों में 18 जहाज़ फंसे हुए हैं जबकि 31 जहाज़ बाहर इंतज़ार कर रहे हैं.

जहाज़ों की आवाजाही दोबारा शुरू करने के लिए तैरते और डूबे कंटेनरों दोनों को ही हटाना होगा.

नौसेना की मदद

इस काम में मुंबई पोर्ट ट्रस्ट के जहाज़ भारतीय नौसेना की मदद कर रहे हैं. अस्थाना ने बताया कि कुछ कंटेनर तैरते हुए बंदरगाहों तक पहुँच गए हैं.

जब अस्थाना से पूछा गया कि क्या इस घटना से भारत की प्रतिष्ठा को धक्का पहुँचा है, तो उन्होंने इससे इनकार किया और कहा कि ऐसी घटनाएँ हर जगह होती रहती हैं और ये घटना बहुत छोटे स्तर की है.

अस्थाना ने कहा, "हमने बंदरगाहों के अधिकारी और दूसरे अधिकारियों को लिखा है कि वो मामले का जल्द समाधान करें. अगर हम निर्यात करने वाले सामान को वक्त पर नहीं भेज पाते तो हमें हवाई जहाज़ का सहारा लेना पड़ेगा, लेकिन अगर ऐसा करने की नौबत आती है तो ये हमारे लिए बेहद महंगा होगा, और हमें भारी घाटा होगा."

उनका कहना था कि अभी ये कहना मुश्किल है कि इससे कितना नुकसान होगा, लेकिन उन्होंने माना कि भारी नुकसान हो रहा है. इस स्थिति से सभी सेक्टरों को नुकसान हो रहा है, जैसे मकई की शराब, टेक्सटाइल, चमड़ा आदि.

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने कहा है कि जहाज़ पर क़रीब 2600 मीट्रिक टन तेल था जिसमें संभवत: 500 मीट्रिक टन तो अरब सागर में रिस ही गया होगा.

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