स्वतंत्रता दिवस के बहिष्कार की घोषणा

  • 10 अगस्त 2010
अलगाववादियों का बहिष्कार

भारत के छह अलगाववादी संगठनों ने स्वतंत्रता दिवस समारोहों के बहिष्कार का ऐलान किया है. इनमें से पाँच उत्तर पूर्व के संगठन हैं जबकि एक संगठन पश्चिम बंगाल के उत्तरी हिस्से में सक्रिय है.

हिंसा की आशंका जताते हुए प्रशासन ने इनके प्रभाव वाले इलाक़ों में रेड अलर्ट घोषित कर दिया है.

असम के पुलिस अधिकारी भास्कर ज्योति महंता ने बीबीसी से कहा, "हमें मिली गुप्तचर जानकारी से संकेत मिलते हैं कि अलगाववादी सीरियल धमाकों को अंजाम दे सकते हैं. यहां तक कि वो असम में तेल के बड़े कारखानों को भी निशाना बना सकते हैं. इसलिए हमने सुरक्षाबलों को सतर्क कर दिया है."

छह अलगाववादी संगठनों ने 15 अगस्त को भारत के उत्तर पूर्व और पश्चिम बंगाल के उत्तरी भाग में हड़ताल करने का भी ऐलान किया है.

इन सभी अलगाववादी संगठनों ने एक वक्तव्य जारी किया है और उनके प्रवक्ता काइशिंग लेनबा की ओर से इसे वितरित किया गया है.

बहिष्कार

वक्तव्य में लिखा है, "ये बहिष्कार भारतीय सेना के ख़िलाफ़ किया जा रहा है. हमारे ख़िलाफ़ बड़े पैमाने पर हो रही भारतीय सेना की कार्रवाई और लोगों को बाँटकर राज करने की नीति से फ़ौज को कुछ जगहों पर तो जीत मिल गई होगी लेकिन हमारे लोगों की आज़ादी की वैध माँग को दबाने की उनकी कोशिश न ही कभी सफल हो पाई है और न ही कभी सफल हो पाएगी."

इस वक्तव्य पर हस्ताक्षर करने वाले संगठन हैं पश्चिम बंगाल उत्तरी भाग में सक्रिय कामतापुर लिबरेशन ऑर्गनाइज़ेशन (केएलओ), मणिपुर पीपुल्स लिबरेशन फ़्रंट (एमपीएलएफ़), नेशनल डेमोक्रेटिक फ़्रंट ऑफ़ बोडोलैंड ( एनडीएफ़बी), नेशनल लिबरेशन फ़्रंट ऑफ़ त्रिपुरा (एनएलएफ़टी), त्रिपुरा पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ़्रंट (टीपीडीएफ़) और यूनाइटेड लिबरेशन फ़्रंट ऑफ़ असम (अल्फ़ा).

अल्फ़ा ने इस महीने की शुरुआत में ही असम के पश्चिमी ज़िले के गोलपारा में बारुदी सुरंग में विस्फोट किया था जिसमें छह सीआरपीएफ़ के जवान मारे गए थे.

गुप्तचर विभाग के अधिकारी कहते हैं कि जब से बांग्लादेश और बर्मा में इन विद्रोही संगठनों के अड्डों पर कड़ी कार्रवाई की गई है तब से ये सभी संगठन दबाव में आ गए है और इन पर दबाव है अपनी ताक़त को दिखाने का. इसलिए वो भारत के पूर्वोत्तर में बड़े धमाकों को अंजाम दे सकते हैं.

उल्लेखनीय है कि एमपीएलएफ़ मणिपुर में सबसे ज़्यादा सक्रिय है, एमडीएफ़बी असम में बोडो समुदाय के लिए एक अलग राज्य की माँग की लड़ाई लड़ रहा है, एनएलएफ़टी और टीपीडीएफ़ त्रिपुरा राज्य की आज़ादी के लिए लड़ रहे हैं जबकि यूएलएफ़ए की माँग है कि असम को भारत से अलग किया जाए.

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