राज्य सरकार सवालों के घेरे में

बीसी खंडूरी
Image caption खंडूरी और निशंक के बीच छत्तीस का आंकड़ा जगजाहिर है.

उत्तराखंड में बीजेपी सरकार अपनी ही पार्टी के नेताओं,विपक्ष और सेक्स स्कैंडल के चौतरफा दबावों से घिर गई है और राजनीतिक गलियारों में मुख्यमंत्री निशंक के कार्यकाल पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूरी निशंक सरकार के कामकाज पर खुली नाराजगी जाहिर करते हुए आगाह कर चुके हैं कि राज्य में सत्ता विरोधी लहर चल रही है.

बीबीसी से खास बातचीत में उन्होंने कहा कि, “उत्तराखंड आंदोलन के सपने पूरे नहीं हो रहे हैं, प्रदेश सरकार की दिशा भटक गई है ,पार्टी में इस बात को लेकर चिंता है और अगर हम इसे नहीं सुधारेंगे तो इसका खामियाजा चुनाव में भुगतना पड़ेंगा.”

अपने कार्यकाल का उदाहरण देते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री निशंक का नाम लिये बिना कहा कि, “सिर्फ वादे और सपने दिखा के सरकार नहीं चल सकती.”

खंडूड़ी को बीजेपी ने तमिलनाडु का प्रभारी बनाकर भेजा था लेकिन वो वहां जाने के बजाय इन दिनों उत्तराखंड में जनसंपर्क और रैलियां कर रहे हैं.

कोटद्वार में एक विशाल रैली करने के बाद 13 अगस्त को देहरादून के पास एक औऱ जलसा आयोजित किया गया है जिसे खंडूरी संबोधित करेंगे. शहीद सम्मान समारोह नाम के इस जलसे को बीजेपी के भीतर खंडूरी खेमे के शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है.

एक साल पहले खंडूड़ी को हटाकर निशंक को मुख्यमंत्री बनाया गया था और इन दोनों नेताओं के बीच छत्तीस का आंकड़ा जगजाहिर है.

हालांकि अब इसमें पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी समेत कुछ मंत्रियों और प्रभावी नेताओं के भी नाम जुड़ गए हैं.लिहाजा पिछले हफ्ते पार्टी के उत्तराखंड प्रभारी अशोक गहलोत को देहरादून आगमन पर अपने ही कार्यकर्ताओं के तीखे सवालों का सामना करना पड़ा.

यौन शोषण की याचिका

Image caption निशंक के कामकाज पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं.

प्रदेश की राजनीति में मची इस खलबली में बुधवार को एक और भूचाल आ गया जब नैनीताल हाईकोर्ट में स्वीकार की गई एक याचिका में निशंक पर अप्रत्यक्ष रूप से यौन शोषण का आरोप लगाया गया.

ये याचिका हत्या के आरोप में जेल की सज़ा भुगत रही एक महिला ने दायर की है. यह महिला फ़िलहाल ज़मानत पर रिहा है.

सूत्रों के मुताबिक याचिका में आरोप लगाया गया है कि 1999 में जब निशंक तत्कालीन यूपी सरकार में संस्कृति और धर्मस्व मंत्री थे उस समय उस युवती पर निशंक को ‘ऑबलाइज’ करने के लिए लगातार दबाव डाला गया था. हाईकोर्ट में याचिका पर 17 अगस्त को सुनवाई होगी.

युवती का ये आरोप भी है कि उसे मौजूदा सरकार से ख़तरा है.

इस्तीफे की मांग

बहरहाल इन आरोपों ने पूर्व कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे हरक सिंह रावत के प्रकरण की याद ताज़ा कर दी है. जिन पर पूर्वोत्तर की एक युवती ने यौन शोषण का आरोप लगाया था और उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था.

कुछ समय पूर्व उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, और आंध्रप्रदेश के पूर्व राज्यपाल नारायण दत्त तिवारी का नाम भी सेक्स स्कैंडल में आ चुका है. स्कैंडल के बाद तिवारी को पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा था.

निशंक का इस स्कैंडल में नाम आने के साथ ही कॉंग्रेस ने तत्काल निशंक के इस्तीफे है और इस मामले की सीबीआई जांच की मांग की है.पार्टी नेता सुबोध उनियाल ने कहा कि, “निशंक को अब कुर्सी पर बने रहने का नैतिक हक नहीं है.”

अभी निशंक ने इस मामले पर सिर्फ यही कहा है कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है.

निशंक को बदलने की मुहिम पहले भी उठी है लेकिन मैनेज करने में माहिर समझे जानेवाले निशंक को अब तक अभयदान मिलता आया है .मगर ऐसा लग रहा है कि इस बार निशंक के लिये सब कुछ इतना आसान नहीं होगा.

बहरहाल ये तय है कि आनेवाले दिन प्रदेश की राजनीति में उथल पुथल औऱ अनिश्चय से भरे हो सकते हैं.

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