ब्लैकबेरी को सरकार का अल्टीमेटम

  • 12 अगस्त 2010
ब्लैकबेरी
Image caption ब्लैकबेरी का निर्माण कनाडा की कंपनी रिसर्च इन मोशन करती है.

केंद्र सरकार ने ब्लैकबेरी बनाने वाली कंपनी रिसर्च इन मोशन (आरआईएम) पर दबाव बनाते हुए कहा है कि अगर सुरक्षा संबंधी उसकी चिंताओं का 31 अगस्त तक समाधान नहीं निकाला गया तो उस पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा.

केंद्रीय गृह सचिव जीके पिल्लई ने गुरुवार को देश की केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों और दूर संचार विभाग के प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक की.

इस संबंध में जारी बयान में कहा गया है कि ब्लैकबेरी से कहा गया है कि वो सुरक्षा एजेंसियों को 31 अगस्त तक दो सेवाओं 'बिजनेस इंटरप्राइजेज सर्विसेस' (बीआईएस) और 'एसएमएस' तक निगरानी की सुविधा उपलब्ध करा दे.

सरकार ने कहा है कि अगर 31 अगस्त तक इसका कोई तकनीकी समाधान नहीं पेश किया गया तो केंद्र सरकार स्थिति की समीक्षा कर इन दोनों सेवाओं पर प्रतिबंध लगा देगी.

सरकार की चिंता

इसके पहले ब्लैकबैरी बनाने वाली कनाडाई कंपनी रिसर्च इन मोशन (आरआईएम) ने कहा था कि वह सरकारों को मोबाइल के जरिए भेजे जाने वाले संदेशों की निगरानी की अनुमति नहीं दे सकती है.

कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी माइक लैज़ारिदिस ने एक अमरीकी अख़बार को दिए साक्षात्कार में कहा था कि इस तरह की अनुमति देने से ग्राहकों के साथ उसके रिश्तों को आँच आएगी.

उनका कहना था कि इन सुविधाओं से कोई समझौता नहीं किया जा सकता है क्योंकि इसी ने तो ब्लैकबेरी को दुनिया की नंबर वन कंपनी बनाया है.

भारत में इस समय ब्लैकबेरी के ग्राहकों की संख्या लाखों में हैं.

कुछ समय पहले गृह मंत्रालय ने सभी तरह की ईमेल और एसएमएस की निगरानी को ज़रूरी बताया था. मंत्रालय ने दूरसंचार विभाग से कहा था कि आरआईएम के लिए भी निगरानी के इस नियम को मानना ज़रूरी है.

सुरक्षा संबंधी चिंताओं की वजह से सऊदी अरब ने ब्लैकबेरी पर प्रतिबंध लगा दिया था जबकी संयुक्त अरब अमीरात इस पर रोक लगाने पर विचार कर रहा है.

भारत में ब्लैकबेरी की सेवाएं भारती एयरटेल, वोडाफ़ोन एस्सार और रिलायंस कम्यूनिकेशन्स जैसे मोबाइल फ़ोन सेवा प्रदाता उपलब्ध कराते हैं.

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