एसआईटी करेगी इशरत मामले की जाँच

  • 12 अगस्त 2010
इशरत जहाँ के शव के साथ उनके परिजन
Image caption इस मुठभेड़ को लेकर सवाल उठते रहे हैं

गुजरात हाईकोर्ट ने गुरुवार को इशरत जहाँ मुठभेड़ की जाँच को सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त विशेष जाँच दल (एसआईटी) को सौंप दिया.

मुंबई निवासी 18 वर्ष की कॉलेज छात्रा इशरत जहाँ और तीन अन्य लोगों की कथित मुठभेड़ में हुई मौत के मामले की जाँच अब एसआईटी करेगी.

सीबीआई के पूर्व निदेशक आरके राघवन एसआईटी के मुखिया हैं.

इशरत जहाँ की माँ शमीना कौसर ने इस मामले की सीबीआई जाँच कराने के लिए गुजरात हाई कोर्ट में अपील की थी.

समाचार एजेंसियों के मुताबिक न्यायाधीश जयंत पटेल और अभिलाषा कुमारी की खंडपीठ ने कहा कि इस मामले की पहले की गई पुलिस जाँच संतोषजनक नहीं है इसलिए मुठभेड़ की असलियत पता लगाने के लिए इसकी और जाँच ज़रूरी है.

न्यायधीशों ने कहा कि जाँच की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए इस मामले को एसआईटी को स्थानांतरित किया गया है.

निर्देश

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को इस मामले को एसआईटी को स्थानांतरित करने संबंधी आदेश दो हफ़्ते में जारी करने का निर्देश दिया है.

अदालत ने एसआईटी को जाँच शुरू करने के तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा है

इशरत जहाँ, जावेद गुलाम शेख़, अमजद अली और जिशान जौहर अब्दुल गनी गुजरात पुलिस की क्राइम ब्रांच के साथ 15 जून, 2005 को अहमदाबाद के पास हुई एक कथित मुठभेड़ में मारे गए थे.

हाईकोर्ट ने इस मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट एसपी तमांग की जाँच रिपोर्ट को भी उपयोगी बताया है.

तमांग ने सात सितंबर, 2009 को सौंपी अपनी रिपोर्ट में इस मुठभेड़ को 'फर्जी' बताते हुए कहा था कि अधिकारियों ने अपने निजी फ़ायदे के लिए इसे अंजाम दिया.

इशरत की माँ शमीना कौसर ने इस मामले की सीबीआई जाँच कराने की अपील करते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था.

जावेद गुलाम शेख़ के पिता ने भी अपने बेटे की मौत की सीबीआई से जाँच कराने की माँग की थी.

मुठभेड़ के बाद गुजरात पुलिस ने इशरत जहाँ और उनके साथ मार गए लोगों को लश्करे तैबा का सदस्य बताते हुए कहा था कि ये लोग मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या के इरादे से आए थे.

पुलिस के मुताबिक़ मुठभेड़ केंद्रीय गुप्तचर एजेंसियों से मिली सूचना के आधार पर की गई थी जिसमें कहा गया था कि लश्कर गुजरात सहित देश के विभिन्न हिस्से में हमले की योजना बना रहा है.

इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामें में केंद्र सरकार ने कहा था कि जावेद लश्कर के सदस्यों के साथ नियमित रूप से संपर्क में था.

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