जाति जनगणना पर आश्वासन

  • 13 अगस्त 2010
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Image caption विपक्ष की मांग के बाद सरकार ने जाति जनगणना पर विचार करने का आश्वासन दिया था

जाति आधारित जनगणना पर विपक्ष के हंगामे के बाद सरकार ने स्पष्ट किया है कि मंत्रिमंडलीय समूह ने इसे मंज़ूरी दी है लेकिन यह किस तरह और कब होगा इसका फ़ैसला मंत्रिमंडल की बैठक में लिया जाएगा.

लोकसभा में सदन के नेता प्रणव मुखर्जी ने कहा, "मंत्रिमंडलीय समूह ने अभी यह फ़ैसला किया है कि जनगणना के काम को प्रभावित किए बिना जाति आधारित जनगणना भी कर ली जाए."

दरअसल लोकसभा में विपक्ष ने गुरुवार को इस बात पर आपत्ति की थी कि जाति आधारित जनगणना बायोमेट्रिक चरण में करने का फ़ैसला किया गया है.

बायोमेट्रिक चरण जनगणना के कई चरणों में से एक है और यह दिसंबर से शुरु होगा. इसमें 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों की फ़ोटो, उंगलियों के निशान और आँखों की पुतलियों की तस्वीरें ली जाएँगी.

इसमें काफ़ी समय लगने के आसार हैं.

आपत्ति और स्पष्टीकरण

विपक्ष की आपत्ति है कि जाति आधारित जनगणना के काम को बायोमेट्रिक जनगणना के साथ नहीं जोड़ना चाहिए क्योंकि यह लंबा समय लगने वाला काम है.

उनका आरोप था कि सरकार जाति आधारित जनगणना को टालने की कोशिश कर रही है.

भारतीय जनता पार्टी, जनता दल यूनाइटेड, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल और बहुजन समाज पार्टी के नेताओं ने इस पर आपत्ति जताते हुए हंगामा किया था. इसके बाद लोकसभा में सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी थी.

जनता दल यूनाइटेड के नेता शरद यादव का कहना था, "बायोमेट्रिक जनगणना सौ साल में भी पूरी नहीं होगी. सरकार ने 18 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों को मतदाता परिचय पत्र देने का फ़ैसला 15 साल पहले पूरा किया था और वह अब तक पूरा नहीं हुआ है."

इसके बाद सदन के नेता वित्तमंत्री के साथ सभी दलों के नेता के साथ बैठक हुई और फिर प्रणव मुखर्जी ने सदन में स्पष्टीकरण दिया.

उन्होंने कहा, "जाति आधारित जनगणना कब और कैसे होगी इसका फ़ैसला अभी नहीं लिया गया है. इस पर विचार हो रहा है."

उनका कहना था कि बुधवार को मंत्रिमंडलीय समिति ने इसे मंज़ूरी दे दी है लेकिन कोई अंतिम फ़ैसला अभी नहीं हुआ है. यह फ़ैसला मंत्रिमंडल को करना है.

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