16 मंत्रियों के खिलाफ आपराधिक मामला

  • 13 अगस्त 2010
तेलंगाना आंदोलन
Image caption आंध्र प्रदेश में पिछले दिनों तेलंगाना मसले पर ढेर सारे प्रदर्शन हुए थे

आंध्र प्रदेश में उन 16 मंत्रियों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं जिन्होंने तेलंगाना राज्य के लिए चल रहे आंदोलन को देशद्रोही और एक अपराध बताया था.

आंध्र और रायलसीमा क्षेत्रों के इन मंत्रियों ने श्रीकृष्ण समिति के सामने तेलंगाना राज्य का विरोध करते हुए एक ज्ञापन दिया था जिसमें कहा गया था कि तेलंगाना राज्य की मांग से देश की अखंडता खतरे में पड़ जाएगी.

अब तेलंगाना के एक वकील की याचिका पर हैदराबाद की एक अदालत ने शुक्रवार को पुलिस को निर्देश दिया कि इन मंत्रियों के विरुद्ध एक आपराधिक मामला दर्ज करे और ज़रूरी कार्रवाई करे.

वकील रंगराव ने तेलंगाना के वकीलों की संयुक्त समिति की ओर से दाखिल की गयी याचिका में आरोप लगाए हैं कि इन मंत्रियों ने तेलंगाना के समर्थकों को देशद्रोही कहकर संविधान का उल्लंघन किया है और दो क्षेत्रों के लोगों के बीच नफरत फैलाने का अपराध किया है.

कार्रवाई की मांग

याचिकाकर्ता रंगराव ने इन मंत्रियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.

रंगराव ने बताया कि, "जज ने महसूस किया कि प्रथम दृष्टि में इन मंत्रियों के विरुद्ध केस बनता है और उन्होंने सैफाबाद पुलिस से कहा कि इन मंत्रियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करे."

अदालत ने कहा है कि इन मंत्रियों के विरुद्ध धारा 499, 500 और 153 अ के अंतर्गत मामले दर्ज किए जाएँ और अदालत को 25 अगस्त तक बताया जाए कि उनके विरुद्ध क्या कार्रवाई की गई.

इन मंत्रियों को यह धक्का ऐसे समय लगा है जब तेलंगाना राष्ट्र समिति, भारतीय जनता पार्टी, तेलंगाना संयुक्त संघर्ष समिति के अलावा खुद कांग्रेस पार्टी भी इन मंत्रियों को बर्खास्त करने की मांग कर रही है.

टीआरएस के नेताओं ने कल ही राज्यपाल नरसिम्हन से भेंटकर इन मंत्रियों को बर्खास्त करने की मांग की थी. टीआरएस के अध्यक्ष के चन्द्रशेखर राव ने कहा है कि अगर इन मंत्रियों ने माफ़ी नहीं मांगी तो उन्हें तेलंगाना में आने नहीं दिया जाएगा.

खंडन

लेकिन इन मंत्रियों के प्रवक्ता और वरिष्ठ मंत्री गड़े वेंकट रेड्डी ने एक बार फिर इस बात का खंडन किया कि उन्होंने तेलंगाना की मांग को राष्ट्र विरोधी बताया था.

उन्होंने शुक्रवार को पत्रकारों से कहा कि तेलंगाना के नेताओं और आम लोगों का वो सम्मान करते हैं. लेकिन उन्होंने यह मांग रद्द कर दी कि जो ज्ञापन श्रीकृष्ण समिति को दिया गया था, उसकी एक प्रति जारी की जाए.

इस ज्ञापन की जो प्रति स्थानीय समाचार पत्रों ने प्रकाशित की है उससे यह स्पष्ट है कि ज्ञापन में तेलंगाना आन्दोलन के लिए राष्ट्र विरोधी और आपराधिक शब्दों का प्रयोग किया गया था.

श्रीकृष्ण समिति ने कहा है कि उसका 99 फ़ीसदी काम पूरा हो गया है और अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को 31 दिसम्बर तक सौंप देगी.

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