अलीगढ़, मथुरा में भड़के किसान

  • 15 अगस्त 2010
किसान आंदोलन
Image caption किसान यमुना एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे थे

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मथुरा और अलीगढ़ में यमुना एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे किसानों और पुलिस के बीच हुए टकराव के बाद राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरु हो गया है.

इस बीच पथराव, आगज़नी, आंसू गैस और फ़ायरिंग की घटनाओं में अब तक तीन किसान और एक पुलिकर्मी की मौत हो चुकी है.

शनिवार को अलीगढ़ में टप्पल के किसान यमुना एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण का विरोध करने के लिए धरने पर बैठे थे. उनकी माँग थी कि उन्हें नोएडा में भूमि अधिग्रहण के समय दिए गए 5000 रुपए प्रति वर्ग मीटर की दर से मुआवज़ा दिया जाए.

उनका नेतृत्व कर रहे थे मथुरा के किसान नेता रामबाबू कठेरिया. मथुरा पुलिस के पास किसान नेता रामबाबू कठेरिया के ख़िलाफ़ गिरफ़्तारी का वॉरंट था. मथुरा पुलिस ने जब अलीगढ़ पुलिस के साथ उन्हें गिरफ़्तार किया तो धरने पर बैठे किसान भड़क गए और उन्होंने पथराव शुरु कर दिया. आँसू गैस छो़ड़ने पर भी जब स्थिति काबू में नहीं आई तो पुलिस को गोली चलानी पड़ी.

अधिकारियों के तबादले

मामले के तूल पकड़ने के बाद अलीगढ़ के पुलिस (शहरी) अधीक्षक विजय प्रकाश को हटाकर उनकी जगह पुलिस अधीक्षक सत्येंद्र वीर सिंह को नियुक्त कर दिया गया है. साथ ही मथुरा के पुलिस अधीक्षक डी पॉलसन भी हटा दिए गए हैं.

पुलिस महानिदेशक ने बीबीसी से हुई बातचीत के दौरान बताया कि अस्पताल में भर्ती घायलों में से दो लोगों की मौत हो गई है. इसके चलते मरने वालों की संख्या बढ़कर चार हो गई है.

इस मामले को लेकर विपक्ष मे मायावती सरकार को आड़े हाथों लिया है. समाजवादी पार्टी ने कहा है कि इस घटना के लिए मुख्यमंत्री सीधे तौर पर ज़िम्मेदार हैं. सपा के नेताओं का कहना है कि वो इस मामले को संसद में उठाएंगे.

किसानों के नेता अजीत सिंह ने कहा कि सरकार किसानों को मुआवज़ा देने कि बजाय उन्हें लाठियां और गोलियां दे रही है.

इस आरोप का जवाब देते हुए उत्तरप्रदेश में सत्ताधारी पक्ष के नेताओं ने कहा कि किसानों को उचित मुआवज़ा दिया जा रहा है लेकिन विपक्ष अपने राजनीतिक हित के लिए उन्हें भड़का रहा है.

वहाँ स्थित तनावपूर्ण बनी हुई है और मथुरा में भी पीएसी के जवानों को तैनात किया गया है.

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