'बातचीत के लिए आगे आएं माओवादी'

  • 15 अगस्त 2010
प्रतिभा पाटिल
Image caption राष्ट्रपति ने माओवादियों को वार्तालाप का रास्ता अपनाने को कहा.

भारत की राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने माओवादियों से वार्तालाप की मेज़ पर आने के लिए कहा है. देश के चौसठवें स्वतंत्रता दिवस की पूर्वसंध्या पर राष्ट्र के नाम संदेश में कहा है कि बातचीत से ही ‘अपने सामने मौजूद मुद्दों का समाधान’ ढूंढा जा सकता है.

राष्ट्रपति पाटिल ने कहा, “उग्र विचारधाराओं के प्रवर्तकों और वामपंथी उग्रवाद के हिमायतियों को हिंसा का रास्ता छोड़ देना चाहिए. मैं उनका आहवान करती हूं कि वे तरक्की और विकास के राष्ट्रीय प्रयासों में शामिल हों.”

उन्होंने उम्मीद जताई कि ‘सिविल समाज के सभी सदस्य और सभी व्यक्ति आगे आकर उनको इस दिशा में आगे बढ़ने में सहयोग देंगे’.

आतंकवाद सबसे बड़ा ख़तरा

प्रतिभा पाटिल ने अपने भाषण में कहा कि आतंकवाद मौजूदा विश्व के लिए सबसे बड़ा ख़तरा है.

पाटिल ने कहा, “आतंकवाद विश्व की शांति, स्थिरता और सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा ख़तरा है. इसे पराजित करने के लिए विश्व के सभी देशों को एकजुट होकर काम करना होगा ताकि आंतकवादियों को कहीं कोई आश्रय, प्रशिक्षण की जगह, कोई वित्तीय साधन और ढांचागत सहायता ना मिले.”

राष्ट्रपति ने लेह में बादल फटने की घटना पर संवेदना को व्यक्त की लेकिन भारत प्रशासित कश्मीर में जारी विरोध प्रदर्शनों और मौतों पर कुछ नहीं कहा.

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