भूस्खलन से गंगोत्री यात्रा रूकी

गंगोत्री भूस्ख़लन
Image caption भूस्ख़लन से 300 से अधिक दुकानें औऱ घर तबाह हो गये हैं

गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग का 50 मीटर का हिस्सा भारी बारिश और भूस्खलन से धंस गया है. इसके कारण राजमार्ग बंद कर दिया गया है और दोनों ओर सैकड़ों यात्री फँसे हुए हैं.

भूस्खलन से 300 से अधिक दुकानें और घर भी तबाह हो गये हैं. गंगोत्री यात्रा पर फ़िलहाल रोक लगा दी गई है.

उत्तरकाशी ज़िले में भटवाड़ी के पास दो दिनों से लगातार भूस्खलन जारी है. राजमार्ग पर पहले दरारें पड़ीं, फिर धँसाव हुआ और जगह-जगह से सड़क टूट कर खाई में गिर गई है.

भटवाड़ी कस्बे का एक बड़ा हिस्सा लगातार भगीरथी की ओर धंसता जा रहा है. इस वजह से वहाँ बनी दुकानें औऱ मकान ध्वस्त हो गये हैं. धीरे-धीरे लगभग पूरा इलाक़ा धँसता जा रहा है.

गंगोत्री से संपर्क कटा

भटवाड़ी कस्बा गंगोत्री से करीब 30 किमी पहले है और इस आपदा के कारण पूरे देश से गंगोत्री धाम का संपर्क कट गया है.

गंगोत्री धाम में दैनिक ज़रूरतों की चीजों की आपूर्ति भी नहीं हो पा रही है. अनुमान के मुताबिक करीब 200 यात्री वाहन उस ओर फंसे हुए हैं.

उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन और समाज कल्याण मंत्री खजान दास ने बीबीसी से बातचीत में बताया कि राहत और बचाव कार्य जारी है. भारी बारिश के कारण इसमें दिक्कतें आ रही हैं लेकिन अधिकारी मौके पर तैनात हैं.

मुआवज़े की घोषणा

मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने भटवाड़ी का दौरा किया और मुआवज़े की घोषणा की है.

हादसे में प्रभावित लोगों को फिलहाल जलविद्युत निगम की मनेरी स्थित कॉलोनी और अन्य सुरक्षित जगहों पर स्थानांतरित कर दिया गया है.

गंगोत्री इलाके में इसी महीने बादल फटने से भी भारी तबाही हुई थी.

इस बीच एक वैज्ञानिक दल भी वहां भूस्खलन का जायजा लेने के लिये गया है. दल के सदस्यों का कहना है कि भागीरथी नदी की घाटी के तल में लगातार जमीन कटने और पहाड़ पर अंधाधुंध हो रहे निर्माण के कारण ये हादसा हुआ है.

इस आपदा को सात साल पहले उत्तरकाशी में वरूणावत पर्वत के टूटने से हुई तबाही से भी जोड़ कर देखा जा रहा है.

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