नक्सलवादी बातचीत करें: मनमोहन सिंह

लाल किले से संबोधित करते मनमोहन सिंह

भारत के 64 वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने लाल क़िले से अपने संबोधन में नक्सलवाद, पाकिस्तान और महँगाई से लेकर विवादित राष्ट्रमंडल खेलों का ज़िक्र किया.

स्वाधीनत दिवस पर राष्ट्रध्वज फ़हराने के बाद अपने भाषण में मनमोहन सिंह ने कहा कि सरकार जम्मू कश्मीर के हर उस व्यक्ति या गुट से बातचीत के लिए तैयार हैं जो हिंसा का रास्ता छोड़ दे.

उन्होंने हाल की हिंसा में मारे गए लोगों के प्रति संवेदना प्रकट की.

मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत का लोकतंत्र उदार है और इसमें सभी मुश्किलों को हल करने की क्षमता है.

साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है.

उन्होंने जम्मू कश्मीर और पूर्वोत्तर राज्यों में लोगों से लोकतांत्रिक व्यवस्था में रहकर काम करने की अपील की.

पाकिस्तान से उम्मीद

मनमोहन सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि कि भारत पड़ोसी देशों के साथ अमन चाहता है और बातचीत के जरिए सभी मसले हल करना चाहता है.

उन्होंने कहा कि भारत पाकिस्तान से उम्मीद करता है कि वो अपनी ज़मीन को दहशतगर्ती के लिए इस्तेमाल नहीं होने देगा.

भारतीय प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि अगर ऐसा नहीं हो पाता है तो बातचीत बहुत आगे नहीं बढ़ पाएगी.

प्रधानमंत्री ने कहा, " हम पड़ोसी देशों के साथ शांति चाहते हैं, जो भी मतभेद हैं, उन्हें बातचीत के जरिए सुलझाना चाहते हैं. जहाँ तक पाकिस्तान की बात है, हम उनसे उम्मीद करते हैं कि वो अपनी ज़मीन का इस्तेमाल हमारे ख़िलाफ़ दहशतगर्दी की गतिविधियों में नहीं होने देगा."

उन्होंने कहा, " हम पाकिस्तान सरकार के साथ अपनी बातचीत में भी इस बात पर जोर देते रहे हैं. अगर ऐसा नहीं होता तो बातचीत के सिलसिले को बहुत आगे तक नहीं बढ़ाया जा सकता."

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत एक मजबूत, स्थिर और संगठित पाकिस्तान चाहता है, लेकिन पाकिस्तान को आतंकवाद के ख़िलाफ़ क़दम बढ़ाना होगा.

नक्सलवादी: बातचीत करें

नक्सलवादियों से अपील की है कि वे सरकार के साथ बातचीत करें.

साथ ही उन्होंने कहा कि हर नागरिक की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी सरकार की है और सरकार हिंसा से सख्ती से निबटेगी.

मनमोहन सिंह ने कहा कि क़ानून का राज कायम करने की ज़िम्मेदारी सरकार की है.

उन्होंने स्पष्ट किया कि नक्सलवाद की चुनौती को केंद्र और राज्य को एकजुट होकर सामना करना होगा.

उनका कहना था कि हमें नए भारत का निर्माण करना है जिसमें सभी नागरिकों की हिस्सेदारी हो.

प्रधानमंत्री ने कहा कि चुनौतियाँ बहुत हैं और हमें एकजुट होकर इनका मुक़ाबला करना है.

उन्होंने माना कि आदिवासियों का शोषण हुआ है और उन तक विकास का लाभ नहीं पहुँचा है.

महंगाई: काबू करने के हरसंभव प्रयास

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि सरकार महंगाई पर काबू पाने के लिए हरसंभव उपाय कर रही है.

उन्होंने कहा कि 2004 में जब संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार सत्ता में आई थी, तो देश में कृषि की हालत संतोषजनक नहीं थी.

उनका कहना था,'' पिछले कुछ वर्षों में कृषि विकास की दर में वृद्धि हुई है, लेकिन हम लक्ष्य से अब भी दूर हैं. हमें और कड़ी मेहनत करने की आवश्यकता है, ताकि कृषि विकास की दर चार फीसदी तक पहुंचाई जा सके.''

उन्होंने कहा, " मुझे पता है कि कीमतों का ग़रीब जनता पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है. हम महंगाई को कम करने की हर मुमकिन कोशिश में लगे हैं. हमें पूरा भरोसा है कि हम जल्द ही इसमें सफल होंगे."

उन्होंने पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में पिछले दिनों की गई वृद्धि को उचित ठहराते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों पर वृद्धि हुई है और देश की अर्थव्यवस्था के लिए इसका बोझ उठाना मुश्किल है.

राष्ट्रमंडल खेल: राष्ट्रीय त्योहार

मनमोहन सिंह ने राष्ट्रमंडल खेलों का बचाव किया और इसे देश के लिए महत्वपूर्ण बताया.

मनमोहन सिंह ने कहा कि डेढ़ महीने बाद दिल्ली में राष्ट्रमंडल खेल होने हैं और ये भारत के लिए गौरवपूर्ण अवसर है.

उन्होंने कहा कि ये सभी देशवासियों के लिए एक राष्ट्रीय त्योहार है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि इसे सफल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे ताकि दुनिया को पता चल सके कि भारत आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है.

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