किसानों पर गोलीबारी के विरोध में हंगामा

  • 16 अगस्त 2010
भारतीय संसद

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ और मथुरा ज़िले में किसानों पर पुलिस फ़ायरिंग के मामले में राजनीति तेज़ हो गई. इसके विरोध में संसद में हंगामा हुआ और कार्यवाही मंगलवार तक के लिए स्थगित करनी पड़ी.

लोक सभा में समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों ने उत्तर प्रदेश में पुलिस फ़ायरिंग में दो किसानों के मारे जाने का विरोध किया और मांग की प्रश्नकाल स्थगित करके इस पर चर्चा कराई जाए.

विपक्षी सदस्य किसानों पर फ़ायरिंग के विरोध में लोक सभा अध्यक्ष मीरा कुमार के आसन के पास तक चले गए और नारेबाजी करने लगे.

हंगामे को देखते हुए मीरा कुमार ने सदन की कार्यवाही दोपहर तक के लिए स्थगित कर दी. राज्यसभा में इस मुद्दे पर प्रश्नकाल के बाद हंगामा हुआ. इसके बाद जब कार्यवाही शुरु हुई तो फिर हंगामा हुआ और कार्यवाही आखिरकार मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी गई.

बाद में उत्तर प्रदेश से कांग्रेस के सांसद जगदंबिका पाल ने समाजवादी पार्टी और भाजपा नेताओं के सुर में सुर मिलाया और पत्रकारों से बातचीत में राज्य की मायावती सरकार को बर्ख़ास्त करने की माँग की.

उनका कहना था कि किसानों की उपजाऊ जमीन प्राइवेट बिल्डरों को नहीं दी जानी चाहिए.

संघर्ष

लखनऊ से बीबीसी संवाददाता रामदत्त त्रिपाठी के अनुसार किसानों और पुलिस के बीच ये संघर्ष यमुना एक्सप्रेसवे के लिए अधिग्रहीत जमीन के मुआवज़े को लेकर हुआ है.

सरकार ये जमीन अधिग्रहीत कर जेपी उद्योग समूह को दे रही है जो सड़क और साथ ही साथ व्यावसायिक नगर भी बना रहे हैं.

सरकार जमीन का मुआवज़ा पांच सौ रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से दे रही है जबकि किसान पांच हज़ार की दर से मुआवज़ा मांग रहे हैं.

किसानों के उग्र आंदोलन को देखते हुए सरकार ने मुआवज़े के मसले पर अलीगढ के मंडलायुक्त की अध्यक्षता में एक समिति बना दी है.

साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों और पुलिस के बीच हुए संघर्ष की न्यायिक जांच के आदेश दे दिए हैं.

कैबिनेट सचिव शशांक शेखर सिंह ने रविवार को प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि सरकार मारे गए व्यक्तियों के परिवारों को पांच-पांच लाख रुपए की आर्थिक सहायता भी देगी.

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