आगरा तक फैला आंदोलन

Image caption अलीगढ़ औऱ मथुरा के बाद अब आगरा के किसान भी आंदोलन पर उतर आए हैं.

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में नोएडा-आगरा के बीच निर्माणाधीन यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक परियोजना में कम मुआवजे के खिलाफ किसानों का उग्र आन्दोलन आज आगरा में फ़ैल गया.

इस बीच अलीगढ के किसानों ने कल रात उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा घोषित बढ़ा हुआ मुआवजा भी नामंजूर कर दिया है और धरना जारी है.

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ब्रजलाल ने संवाददाताओं को बताया कि आगरा के एत्मादपुर के पास चौगान, थलेसर और गढ़ी रामी गाँवों के किसानों ने निर्माणाधीन यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक परियोजना के विरोध में सड़क जाम कर दी.

पुलिस के अनुसार इन किसानों ने अधिकारियों पर पथराव किया जिसमे कई अफसर घायल हो गए.

आगरा से एक स्थानीय पत्रकार ने बताया कि हालात को काबू में करने के लिए पुलिस को फायरिंग भी करनी पड़ी.

इन तीनों गाँवों के किसान अपनी जमीनों के मुआवजे पर असंतोष प्रकट करते हुए नोएडा के बराबर मुआवजे की मांग कर रहे हैं.

मामले की गंभीरता को देखते हुए आगरा के मंडलायुक्त मौके पर ही किसानों के साथ बातचीत कर रहे हैं.

इस बीच पता चला है कि अलीगढ में टप्पल और आसपास के गाँव वालों ने सोमवार की रात सरकार द्वारा घोषित बढ़ा हुआ मुआवजा भी नामंजूर कर दिया है.

उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट सचिव शशांक शेखर सिंह ने सोमवार की रात किसानों के नेता राम बाबू कटेलिया को जेल से से अलीगढ के एक गेस्ट होंउस में बुलाकर समझौता घोषित किया था.

इसमें किसानों को 570 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से मुआवजा देने की बात कही गई थी.

कैबिनेट सचिव ने कहा था कि जो लोग इस दर से भुगतान नही लेना चाहते सरकार उनकी जमीन जबरन नही लेगी.

किसान नेता राम बाबू सुबह जमानत पर रिहा होकर गांव गए और समझौते को उचित बताते हुए अपनी ओर से धरना समाप्त करने की घोषणा कर दी.

लेकिन कुछ देर बाद बाकी किसानों ने आपत्ति कर दी और फिर से धरना चालू कर दिया.

किसानों के असंतोष को देखते हुए सरकार ने अलीगढ, मथुरा , आगरा, हाथरस , बुलंदशहर और आसपास के इलाकों में शांति व्यवस्था के लिए बड़े पैमाने पर सशस्त्र बल तैनात कर दिए हैं.

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