सरकार ने ज़मीन का मुआवज़ा बढ़ाया

किसानों का धरना
Image caption किसान अपनी ज़मीन की अधिक क़ीमत मांग रहे हैं

उत्तर प्रदेश में 'ताज एक्सप्रेस वे' के लिए ली जा रही ज़मीन के बदले ज़्यादा मुआवज़ा माँग कर रहे किसानों को मायावती सरकार ने मुआवज़े की दर बढ़ाकर 570 रुपए प्रतिवर्ग मीटर करने की घोषणा की है.

राज्य के कैबिनेट सचिव शशांक शेखर सिंह और कुछ वरिष्ठ मंत्रियों की किसान नेता रामबाबू कटेरिया के साथ मंगलवार को तड़के हुई बैठक के बाद मुआवज़ा बढ़ाने की घोषणा की गई है.

इससे पहले किसानों को 449 रुपए प्रति मीटर की दर से मुआवज़ा दिया जा रहा था.

सरकार का कहना है कि जो ज़मीन अधिग्रहित की जा रही है उसमें जो फसल, पेड़, बोरिंग और कुएँ इत्यादि है, उसका भी नियमानुसार समुचित मुआवज़ा दिया जा रहा है.

मुआवज़े की नई घोषणा के साथ सरकार की ओर से कैबिनेट सचिव ने कहा है कि 'जो किसान ज़मीन नहीं देना चाहेगा उसकी ज़मीन नहीं ली जाएगी.'

उल्लेखनीय है कि मथुरा और अलीगढ़ ज़िलों के किसान ताज एक्सप्रेस वे के लिए ज़मीन का उचित मुआवज़ा दिए जाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं.

गत 14 अगस्त को आंदोलनकारियों पर पुलिस ने गोली चलाई थी जिसमें कम से कम दो किसान मारे गए थे. इसके बाद किसानों के नेता रामबाबू कटेरिया को गिरफ़्तार कर लिया गया था.

ज़मानत

बीबीबीसी संवाददाता रामदत्त त्रिपाठी के अनुसार किसानों के नेता रामबाबू कटेरिया अस्पताल में भर्ती थे और वहीं से उन्हें चर्चा के लिए ले जाया गया था.

इसके बाद दिन में रामबाबू कटेरिया को अलीगढ़ की एक अदालत से ज़मानत मिल गई है.

संभावना है कि अब रामबाबू कटेरिया अब किसान संघर्ष समिति के सदस्यों से मुआवज़े की नई दर के बारे में चर्चा करेगी और उसके बाद यह फ़ैसला करेगी कि किसानों को नई दर मंज़ूर है या नहीं.

किसान मांग कर रहे हैं कि उन्हें भी उसी दर पर ज़मीन का मुआवज़ा दिया जाना चाहिए जिस दर पर पड़ोस के गौतम बुद्ध नगर के किसानों को दिया गया है.

किसानों का और विपक्षी दलों का आरोप है कि ज़मीन का अधिग्रहण करने के बाद उसे निजी बिल्डरों को दिया जाना है जिसे बिल्डर कई गुना दामों पर बेचेंगे.

दिल्ली से आगरा के बीच प्रस्तावित 165 किलोमीटर लंबे ताज एक्सप्रेस वे का उद्देश्य दोनों शहरों के बीच यात्रा में लगने वाले समय को कम करना है.

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