मेरी ओर से धरना ख़त्म: रामबाबू

  • 17 अगस्त 2010
किसानों का धरना
Image caption किसान अपनी ज़मीन की अधिक क़ीमत मांग रहे हैं

उत्तर प्रदेश में 'ताज एक्सप्रेस वे' के लिए ली जा रही ज़मीन के बदले मुआवज़े की नई दर को स्वीकार करते हुए किसानों के नेता रामबाबू कटेरिया ने कहा है कि उनकी ओर से धरना ख़त्म हो गया है.

अदालत से ज़मानत मिलने के बाद धरना दे रहे किसानों से बातचीत करने पहुँचे रामबाबू कटेरिया ने कहा है कि जिन किसानों को यह दर मंज़ूर नहीं है वे चाहें तो अपनी ज़मीन सरकार को न दें.

उल्लेखनीय है कि कटेरिया से मंगलवार को तड़के उत्तरप्रदेश सरकार के कई बड़े अधिकारियों की हुई चर्चा के बाद सरकार ने मुआवज़े की राशि 449 रुपए प्रति वर्ग मीटर से बढ़ाकर 570 रुपए करने की घोषणा की थी.

यह समझौता मथुरा और अलीगढ़ ज़िले के कुछ गाँवों के किसानों की ज़मीन को लेकर था.

लेकिन इस बीच आगरा के चौगान में किसानों का आंदोलन ने हिंसक रुप ले लिया है.

वहाँ किसानों पर लाठीचार्ज हुआ है और गोलीबारी की गई है जिसमें कई किसान घायल हुए हैं.

धरना ख़त्म

ज़मानत मिलने के बाद किसान नेता रामबाबू कटेरिया धरना दे रहे किसानों के पास पहुँचे थे.

उन्होंने किसानों से चर्चा की और उसके बाद किसानों का आंदोलन ख़त्म करने की घोषणा कर दी.

जैसा कि उत्तर प्रदेश के कैबिनेट सचिव शशांक शेखर सिंह ने कहा था, रामबाबू कटेरिया ने भी दोहराया, "जिन किसानों को मुआवज़े की नई दर स्वीकार न हो वे चाहें तो अपनी ज़मीन सरकार को न दें."

कटेरिया की इस घोषणा के बाद से मामला किसान संघर्ष समिति के हाथों से निकलकर एक-एक किसान का मामला बन गया है और अब हर किसान ख़ुद तय करेगा कि वह अपनी ज़मीन 'ताज एक्सप्रेस वे' के लिए दे या न दे.

उल्लेखनीय है कि कई दिनों से मथुरा और अलीगढ़ ज़िलों के किसान ताज एक्सप्रेस वे के लिए ज़मीन का उचित मुआवज़ा दिए जाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे.

उनकी मांग थी कि उन्हें भी उसी दर पर ज़मीन का मुआवज़ा दिया जाना चाहिए जिस दर पर पड़ोस के गौतम बुद्ध नगर के किसानों को दिया गया है.

गत 14 अगस्त को आंदोलनकारियों पर पुलिस ने गोली चलाई थी जिसमें कम से कम दो किसान मारे गए थे. बाद में एक और किसान की मौत हुई थी.

चौगान में भी फ़ायरिंग

इस बीच 'ताज एक्सप्रेस वे' के रास्ते में आने वाले आगरा के चौगान में किसानों के आंदोलन ने हिंसक रुप ले लिया है.

वहाँ भी किसान मुआवज़े की दर बढ़ाने की मांग कर रहे हैं.

अधिकारियों का कहना है कि किसानों की ओर से हुए पथराव के बाद सुरक्षा बलों को गोली चलानी पड़ी है और लाठीचार्ज करना पड़ा है जिसकी वजह से कई किसान घायल हुए हैं.

उनका कहना है कि सोमवार को किसानों ने कुछ सुरक्षाकर्मियों से रायफ़लें छीन ली थीं उसके बाद मंगलवार को वहाँ और बल भेजा गया था.

इस बीच प्रशासन ने वहाँ पुलिस के अलावा पीएसी को तैनात किया है और कई बड़े अधिकारियों को वहाँ भेजा गया है.

मथुरा और अलीगढ़ के किसानों के लिए मुआवज़ा बढ़ाने की जो घोषणा हुई है वह फ़िलहाल चौगान के अधिकारियों पर लागू नहीं होंगी क्योंकि वह सिर्फ़ वहाँ के चार-पाँच गाँवों के किसानों के लिए है.

किसानों का और विपक्षी दलों का आरोप है कि ज़मीन का अधिग्रहण करने के बाद उसे निजी बिल्डरों को दिया जाना है जिसे बिल्डर कई गुना दामों पर बेचेंगे.

दिल्ली से आगरा के बीच प्रस्तावित 165 किलोमीटर लंबे 'ताज एक्सप्रेस वे' का उद्देश्य दोनों शहरों के बीच यात्रा में लगने वाले समय को कम करना है.

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