किसान एकता में सेंधमारी के प्रयास

किसानों का आंदोलन जारी
Image caption किसानों का आंदोलन जारी, सरकार उन्हें मनाने की कोशिश कर रही है.

यमुना एक्सप्रेस-वे और जेपी टाउनशिप के मुआवज़े की मांग को लेकर एतमादपुर के किसान इन दिनों आदोंलन की राह पर हैं.

पिछले चार दिनों से किसानों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच लगातार वार्ता चल रही है. जहां एक तरफ़ सत्ता पक्ष, किसानों के संगठन में सेंध लगा कर उन्हें कमज़ोर करने के प्रयास में है तो दूसरी तरफ़ किसानो में भी एकजुटता बनी हुई है और वे धरने पर बैठे हैं.

हालाँकि बुधवार की रात लखनऊ से आनन फ़ानन में आगरा आए कैबिनेट सचिव शशांक शेखर के सामने सत्ता पक्ष के नेताओं ने किसानो के संगठन से चार किसानों को बातचीत के लिए सर्किट हाउस बुला लिया था और शशांक शेखर ने मुआवज़े की राशी भी बढ़ाकर 570 रु.प्रति वर्ग मीटर कर दी लेकिन इसके लिए दबाव में लाए गए किसान भी तैयार नहीं हुए और वह भी वापस धरने पर जाकर बैठ गए .

अब किसान अपनी नौ मांगो को लेकर धरने पर बैठे हुए हैं .

किसानों की मांग

किसान संघर्ष समिति के एक सक्रिय सदस्य मनोज शर्मा ने बीबीसी को बताया की उनकी मांग है की उन्हें नोएडा के बराबर मुआवज़ा दिया जाए और जो किसान अपनी ज़मीन नहीं देना चाहता है उसकी ज़मीन का अधिग्रहण न किया जाए.

जिन किसानों ने प्रशासन के दबाव में पहले क़रार कर दिए हैं लेकिन अब यदि वे ज़मीन देना नहीं चाहते हैं तो उनका क़रार समाप्त कर दिया जाए और जिन किसानों को पुरानी दर से मुआवज़ा मिल चुका है उन्हें भी जो मुआवज़े की नई दर तय हो, वही मिले.

आगरा के एतमादपुर के गाँव गारी रमी ,चोगान, छलेसर , बंगरा ,गोला का नगला आदि से 491 एकड़ ज़मीन यमुना एक्सप्रेस वे के लिए अधिग्रहीत की जा रही है.

किसानों को लुभाने का प्रयास

आगामी दो माह के अंदर प्रदेश में पंचायत चुनाव होने हैं तो ऐसे में सभी राजनैतिक दल इस प्रयास में हैं की इस मामले में किसानों की सहानुभूती उन्हें मिल जाए.

सत्ताधारी दल भी किसानों की मांगो को इसी कारण अनदेखा नहीं कर पा रहा है. प्रदेश सरकार के चार मंत्री लगातार यही प्रयास कर रहें हैं की किसानों की एकजुटता कैसे तोड़ी जाए.

इसके लिए घर-घर जाकर सत्ताधारी नेता यही प्रयास कर रहें हैं की किसान उनके प्रभाव और दबाव में आकर सरकार द्वारा निर्धारित मुआवज़े पर मान जाऐं. प्रशासन भी किसानों पर बार बार दबाव बना रहा है .

आगरा के ज़िलाधिकारी अमृत अभिजात ने बताया कि कैबिनेट सचिव शशांक शेखर से किसानों का प्रतिनिधि मंडल मिला था और सहमति बन रही थी .लेकिन 30-40 किसान चाहते थे की उनकी बात भी सुनी जाए क्योंकि मामला राजनीतिक हो गया है.

23 अगस्त को इस मुद्दे पर एक रैली आयोजित करने की तैयारी की जा रही है.

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