मूत्र से ईंधन बनाने की तैयारी

Image caption मूत्र से बने ईंधन का इस्तेमाल बिजली बनाने के लिए किया जा सकता है

विज्ञान ने अब मूत्र का भी एक इस्तेमाल ढूंढ लिया है. स्कॉटलैंड की हैरियट-वॉट यूनिवर्सिटी के अनुसंधानकर्ता मूत्र से ईंधन बनाने की तैयारी कर रहे हैं.

अनुसंधानकर्ताओं ने एक ऐसा तरीका ईजाद किया है जिसके ज़रिए ये पता लगाया जा सके कि मूत्र में मौजूद तत्वों का इस्तेमाल ज्वलनशील हाइड्रोजन या मीथेनॉल के विकल्प के रूप में किया जा सकता है या नहीं.

इंसान और पशुओं के मूत्र में मौजूद यूरिया यानी 'कार्बामाइड' एक रासायनिक तत्व है जिसका इस्तेमाल खाद और उर्वरक बनाने में किया जाता है.

कार्बामाइड के इस्तेमाल से बनाए जा रहे इस ईंधन से कम प्रदूषण फ़ैलाने वाला, किफ़ायती और आसानी से लाने ले जाने योग्य ईंधन बनाया जा सकता है.

फ़िलहाल यूरिया का इस्तेमाल भारी वाहनों में होता है ताकि ईंधन में मौजूद प्रदूषण फ़ैलाने वाले ख़तरनाक तत्वों को कम किया जा सके. ईंधन में यूरिया के इस्तेमाल को दुनियाभर में आसान बनाने के लिए इन दिनों संसाधन जुटाए जा रहे हैं.

अनुसंधानकर्ता शानवेन ताओ और उनके सहयोगी रौंग लैन फ़िलहाल इस ईंधन का एक प्रारूप बनाने की तैयारी कर रहे हैं.

मूत्र में मौजूद यूरिया से बनने वाले ईंधन का इस्तेमाल ख़ासतौर पर पनडुब्बियों, सैनिक वाहनों और दूरदराज़ के इलाकों जैसे रेगिस्तान और दूदराज के द्बीपों पर बिजली बनाने के लिए किया जा सकता है.

डॉक्टर ताओ ने कहा,'' मैं चीन के एक ग्रामीण इलाके में पला-बढ़ा हूं. मुझे पता था कि यूरिया का इस्तेमाल गांवों में रासायनिक खाद के रुप में होता है. जब मैंने रसायनविज्ञान पढ़ा, तब इस तरह का ईंधन बनाने के बारे में सोचा.''

उनका कहना था,''फ़िलहाल हम इस ईंधन का केवल एक नमूना तैयार कर रहे हैं, लेकिन अगर इसका इस्तेमाल पर्यावरण के लिए सुरक्षित और व्यावसायिक रुप से इस्तेमाल होने वाले ईंधन के तौर पर हो सकेगा तो हमें बेहद खुशी होगी. इससे दुनियाभर में लोगों को फ़ायदा होगा.''

यह नमूना ‘फ़्यूल सेल्स’ की मदद से बनाया जा रहा है, जो रासायनिक तत्वों को विद्युत ऊर्जा में बदलते हैं. फ़िलहाल ‘फ़्यूल सेल्स’ में केवल हाइड्रोजन और मीथेनॉल का इस्तेमाल होता है.

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