थोड़ा ग़ुस्सा, थोडी़ हमदर्दी

  • 21 अगस्त 2010
ऑटो चालक
Image caption ऑटो रिक्शा चालक रवि सिक्का का मानना है कि भारत-पाक संबंध कभी नहीं सुधर सकते हैं.

पाकिस्तान के लिए भारत ने आर्थिक मदद की पेशकश की है लेकिन क्या चाहते हैं भारतीय नागरिक इस पर बीबीसी की टीम ने बात की दिल्ली में लगभग हर तबके के लोगों से.

पाकिस्तान बाढ़ से लगभग दो करोड़ लोग प्रभावित हुए हैं. कई लोग बेघर हो गए हैं तो कईयों को बाढ़ ने उनके अपनों से जुदा कर दिया है.

ऐसे में विभिन्न देश अपनी तरफ़ से पाकिस्तान के लिए आर्थिक मदद का हाथ बढ़ा रहे हैं.

उसी कड़ी में भारत ने भी पाकिस्तान के लिए 50 लाख डॉलर की रकम बतौर मदद देने की पेशकश की थी. पहले तो पाकिस्तान ने भारत का शुक्रिया अदा करते हुए मदद लेने पर सोच विचार करने की बात कह डाली थी.

लेकिन अब इस आर्थिक मदद की पेशकश भारत ने दोहराई है जिसके बाद पाकिस्तान ने भारत की मदद स्वीकार करने का फ़ैसला किया है.

इन दोनों देशों के बीच हुए इस पूरे घटनाक्रम के बाद भारतीय नागरिक क्या सोचते हैं. क्या वो भारत की तरफ़ से पाकिस्तान को दी जा रही मदद के पक्ष में हैं या वो पाकिस्तान की मदद करने के ख़िलाफ़ हैं इस पर बीबीसी ने अलग- अलग तबके के लोगों से बात की.

थोड़ा ग़ुस्सा

सबसे पहले हम गए भारत की राजधानी दिल्ली का दिल कहे जाने वाले कनॉट प्लेस में. यहाँ सबसे पहले हमे मिले रवि सिक्का. ये जनाब कनॉट प्लेस में ऑटो रिक्शा चलाते हैं. इनकी जड़ें ख़ुद पाकिस्तान से जुड़ी हुई हैं लेकिन वो भारत की तरफ़ से पाकिस्तान को आर्थिक मदद के सख़्त ख़िलाफ़ हैं.

रवि सिक्का कहते हैं, " भारत को पाकिस्तान की मदद बिल्कुल नहीं करनी चाहिए. 1947 में जब बंटवारा हुआ था तो उन्होंने हमारे हिंदुओं को बाहर निकाल दिया था. दोनों के बीच के रिश्ते कभी नहीं सुधरेंगे, सारी उम्र नहीं सुधर सकते हैं."

थोड़ा आगे चलने पर हमारी मुलाक़ात हुई कनॉट सर्कल पर खड़े मुद्दत से जो शायद किसी का इंतज़ार कर रहे थे. मुद्दत की उम्र लगभग तीस साल है और वो एक बैंक में काम करते हैं. लेकिन एक ऑटो चालक और एक बैंक के कर्मचारी की सोच बिल्कुल एक है.

मुद्दत ने कहा, " मैं नहीं चाहता कि हम लोग पाकिस्तान की सहायता करें. हमारे देश में जितनी चरमपंथी गतिविधियाँ हो रही हैं वो सब उनकी वजह से हैं. अगर उन्हें हमारी जान की फ़िक्र नहीं है तो हम उनकी जान की परवाह क्यों करें?"

थोड़ी हमदर्दी

Image caption राजेश और उसका पूरा परिवार चाहता है कि भारत अपने पड़ोसी देश की मदद करके अच्छा काम कर रहा है.

लोगों की ये राय सुनकर लगा कि भारत में बढ़ रहे आतंकवाद को लेकर लोगों में पाकिस्तान के लिए काफ़ी ग़ुस्सा है. लेकिन कुछ और लोगों से मिलने पर तस्वीर कुछ अलग सी दिखी. भारत में कई ऐसे लोग भी हैं जो ऐसे मौक़े पर गड़े मुर्दे नहीं उखाड़ना चाहते .

उनका मानना है कि इंसानियत के नाते पाकिस्तान में बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद ज़रूर करनी चाहिए.

कनॉट प्लेस की सड़कों पर रोज़ हस्तशिल्प के बैग बेचती हैं राधा. वो कहती हैं कि पाकिस्तान में उग्रवादी तो हैं, लेकिन अगर देखा जाए तो हमें ऐसे मौक़े पर पाकिस्तान के लोगों की मदद ज़रूर करनी चाहिए.

कनॉट प्लेस से लगभग तीन किलोमीटर दूर है इंडिया गेट जहाँ रोज़ पर्यटक घूमते हुए नज़र आते हैं, देसी – विदेशी दोनों. वहीं पर लगभग 45 साल के राजेश अपने परिवार के साथ घूमने आए हुए थे. वो कहते हैं, "पाकिस्तान हमारा पड़ोसी देश है, एक पड़ोसी देश जब दुख में होता है तो उसकी मदद करनी चाहिए."

भारतीय नागरिकों की काफ़ी मिली जुली राय है. जहाँ कई लोग भारत में हो रही चरमपंथी घटनाओं के लिए पाकिस्तान को दोषी मानते हैं वहीं कुछ ऐसे भी हैं जिन्हें पाकिस्तान में रह रहे लोगों के साथ हमदर्दी है और तहे दिल से चाहते हैं कि ऐसे मौक़े पर, जैसे भी हो सके, अपने पड़ोसी देश की मदद के लिए आगे आना चाहिए.

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