बंदूक के साये में छत्तीसगढ़ में पंचायत उपचुनाव

दांतेवाड़ा
Image caption उपचुनावों के लिए कड़े सुरक्षा इंतज़ाम किए गए हैं.

छत्तीसगढ़ में रविवार को हो रहे पंचायत उप-चुनाव को लेकर प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को काफ़ी मजबूत कर दिया है.

राज्य के बीजापुर ज़िले से शनिवार देर रात को मिली ख़बरों के अनुसार पामेड़ जा रहे एक मतदान कर्मियों के दल के चेरेला में फंसे होने की बात की जा रही है.

पामेड़ में पांच पंचायतों के लिए मतदान होना है और यहां पर मतदान कर्मी आंध्र प्रदेश की सीमा की ओर जा रहे थे, तभी माओवादियों ने चेरेला से पामेड़ जा रही सड़क अवरोध खड़े कर दिए.

हांलाकि माओवादियों ने पंचायत उप-चुनाव के बहिष्कार की घोषणा की है मगर राज्य चुनाव आयोग के सचिव डीडी सिंह ने बीबीसी के साथ बातचीत में दावा किया है कि मतदान के लिए पुख़्ता इंतज़ाम किए गए हैं.

ये पंचायत उप-चुनाव दो जनपद सदस्यों, 36 सरपंचों और 2313 पंचों के लिए होगा.

डीडी सिंह का कहना था कि इसी वर्ष फ़रबरी में हुए पंचायत चुनाव में इन स्थानों पर विभिन्न कारणों से चुनाव नहीं हो पाया था जिनमें से एक माओवादियों की धमकी भी थी.

उम्मीदवारों की कमी

लेकिन सुरक्षा के तमाम दावों के बावजूद एक जनपद सदस्य, 19 सरपंच और 900 पंच के पदों के लिए कोई उम्मीदवार सामने नहीं आया है.

नक्सल प्रभावित बीजापुर ज़िले में सरपंच के आठ पदों पर कोई दावेदारी नहीं हो पाई, वहीं 544 पंच के पदों के लिए मात्र 171 उम्मीदवार ही सामने आए हैं यानि पंचों के 373 पद खाली ही रह जाएंगें.

उसी तरह दांतेवाड़ा में तीन सरपंच के पदों में से एक ख़ाली रह जाएगा जबकि 262 पंचों के पदों के लिए मात्र 131 स्थान के लिए ही उम्मीदवार खड़े हुए हैं.

बस्तर के ही कांकेर ज़िले में तीन सरपंच और 200 पंच के पदों पर कोई उम्मीदवार सामने नहीं आया है.

उम्मीदवारों की कमी की एक वजह ये भी हो सकती है कि अधिकतर जगहों में मतदान केंद्र गांव में ना होकर पुलिस या सलवा जुड़ुम के कैंपों में रखे गए हैं.

कुछ स्थानों पर ये मतदान केंद्र गांव से 40 किलोमीटर तक की दूरी पर है.

बहरहाल बड़ा कारण तो माओवादियों का ख़ौफ़ ही है, जिन्होंने इन पंचायत उप-चुनावों के बहिष्कार का आहवान किया है.

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