यूपी: कुशीनगर में ज़मीन वापस करने का फ़ैसला

किसान

उत्तर प्रदेश की मायावती सरकार ने किसानों का आंदोलन पूर्वांचल में फ़ैलने से रोकने के लिए कुशीनगर में उन दो गाँवों के किसानों की ज़मीन वापस करने का फ़ैसला कर लिया है जो प्रस्तावित हवाई अड्डे के लिए अपनी ज़मीन देने से मना कर रहे हैं.

साथ ही मायावती सरकार ने कुशीनगर की विवादास्पद मैत्री परियोजना रद्द करने का संकेत दिया . उत्तर प्रदेश के कैबिनेट सचिव शशांक शेखर सिंह ने रविवार रात एक संवाददाता सम्मलेन में कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार केवल उन्ही किसानों की ज़मीन अधिग्रहित करेगी जो करार नियमावली के तहत सहमति के आधार पर मुआवज़ा लेने को तैयार होंगे.

सवालों के जवाब में कैबिनेट सचिव ने जानकारी दी कि कुशीनगर में जो किसान समझौते से हवाई अड्डे या मैत्रेय परियोजना के लिए अपनी ज़मीन नहीं देना चाहते हैं, सरकार ने उनकी ज़मीन वापस करने का निर्णय कर लिया है.

स्पष्ट है कि किसान आंदोलन के कारण माया सरकार अपने कदम वापस लेने को विवश हो गई है.

बाद में सरकार के पर्यटन सचिव अवनीश अवस्थी ने बीबीसी को बताया कि कुशीनगर में कसिया बाजार से सटे दो गाँवों भलुही मदारी और बिशुनपुर बिन्दौलिया की ज़मीन हवाई अड्डे के विस्तार की योजना से अलग करके किसानों को वापस करने का आदेश हो गया है.

ये किसान जान देकर भी अपनी ज़मीन बचाने की बात कर रहे थे क्योंकि ये काफ़ी उपजाऊ हैं और बाजार मूल्य प्रस्तावित मुआवज़े से कई गुना ज्यादा.

शेष 11 गाँवों के किसान सरकार से समझौते के तहत 845 से 970 रुपए प्रति वर्ग मीटर की दर से ज़मीन दे रहे हैं और इनका मुआवज़ा बंटना शुरू हो गया है.

समझा जाता है कि हवाई अड्डे के विस्तार के लिए ये ज़मीन काफ़ी है.

साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार ने कुशीनगर में एक निजी संस्था द्वारा प्रस्तावित विवादास्पद मैत्री परियोजना को रद्द करने का साफ़ भी संकेत दे दिया है.

इस परियोजना से पीड़ित सैकड़ों किसान चार वर्ष से लगातार धरना कर रहे हैं.

एक अफसर ने कहा कि इस परियोजना पर भी पुनर्विचार करके भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया रद्द कर दी जाएगी.

किसान आंदोलन से परेशान

कैबिनेट सचिव ने दावा किया कि पश्चिम में अलीगढ़ और आगरा के किसानों ने सरकार से समझौते के बाद अपना आंदोलन ख़त्म कर दिया है.

पत्रकारों ने उनके दावे को चुनौती दी तो कैबिनेट सचिव ने कहा कि केवल कुछ लोग ही धरना दे रहे होंगे.

शशांक शेखर सिंह ने प्रेस कांफ्रेंस में मुख्यमंत्री मायावती का एक बयान भी पढ़ा जिसमें उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों के 26 अगस्त को संसद घेरने के कार्यक्रम का बहुजन समाज पार्टी की ओर से समर्थन किया है.

अजित सिंह के नेतृत्व वाले लोक दल ने संसद घेरने का कार्यक्रम किया है जिसमे किसान संगठन भी शामिल हैं.

मायावती ने अपने बयान में कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी का नाम तो नहीं लिया लेकिन उन्होंने पूरे देश में किसानों और आदिवासियों की समस्याओं और बढ़ते नक्सलवाद के लिए कांग्रेस पार्टी को ज़िम्मेदार बताया.

मायावती ने विपक्षी भारतीय जनता पार्टी को भी आड़े हाथों लिया.

मायावती के अनुसार किसानों की सारी समस्याओं के लिए पुराना भूमि अधिग्रहण क़ानून ज़िम्मेदार है और इसमें तुरंत संशोधन होना चाहिए.

मुख्यमंत्री के बयान से साफ़ है कि वो किसानों के आंदोलन का रुख़ दिल्ली के तरफ मोड़ना चाहती हैं जहां कांग्रेस की सरकार है.

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