बाबरी विध्वंस मामले की सुनवाई शुरू

  • 24 अगस्त 2010
फ़ाइल फ़ोटो

अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस के 18 वर्ष पुराने मामले की सोमवार से अदालत में सुनवाई शुरू हुई.

छह दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के बाद देश भर में सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी थी जिसमें दो हज़ार से अधिक लोगों की जान गई थी.

अभियोजन पक्ष की ओर से सबसे पहले पुलिस सबइंस्पेक्टर प्रियंवदा शुक्ला को बतौर गवाह पेश किया गया.

प्रियंवदा शुक्ला छह दिसंबर को अयोध्या थाने के प्रभारी थे.

उन्होंने ही हज़ारों कारसेवकों के ख़िलाफ़ प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफ़आईआर) दर्ज की थी.

प्रियंवदा शुक्ला ने विध्वंस के पूरे घटनाक्रम को बयान किया और कहा कि स्थानीय नेता पवन पांडे कारसेवकों को मस्जिद ढहाने के लिए उकसा रहे थे.

इसके पहले पिछले हफ़्ते अयोध्या मामले के विशेष जज वीरेंद्र कुमार ने 23 लोगों के ख़िलाफ़ आरोप पढ़े थे.

इसमें तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट आरएन श्रीवास्तव, विश्व हिंदू परिषद और भारतीय जनता पार्टी के कुछ पदाधिकारी शामिल हैं.

सीबीआई की चार्जशीट

इसके पहले सीबीआई 49 लोगों के ख़िलाफ़ चार्जशीट दाख़िल कर चुकी है जिसमें पूर्व गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी, पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह और विश्व हिंदू परिषद के नेता अशोक सिंघल शामिल हैं.

हालांकि अदालत ने हाई कोर्ट के आदेश पर तकनीकी आधार पर 21 लोगों को इस मामले से बरी कर दिया है.

जिन लोगों को तकनीकी आधार पर बरी किया है, उनमें भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी, विश्व हिंदू परिषद नेता अशोक सिंघल और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह और शिव सेना प्रमुख बाल ठाकरे शामिल हैं.

हालांकि लालकृष्ण आडवाणी और सात अन्य लोग रायबरेली की विशेष अदालत में भड़काऊ और सांप्रदायिक भाषण देने के आरोपों का सामना कर रहे हैं.

लेकिन न्याय व्यवस्था की जटिलताओं का लाभ कल्याण सिंह और बाल ठाकरे को मिला है और उन्हें किसी आपराधिक मामले का सामना नहीं करना पड़ रहा है.

इधर लखनऊ हाईकोर्ट की विशेष खंडपीठ अगले महीने मंदिर-मस्जिद विवाद पर अपना फ़ैसला सुनाने जा रही है.

इस फ़ैसले की गंभीरता के मद्देनज़र उत्तर प्रदेश सरकार ने क़ानून व्यवस्था को लेकर कमर कसनी शुरू कर दी है.

राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से बड़ी संख्या में अर्धसैनिक बलों की मांग की है.

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