दार्जिलिंग में हड़ताल से जीवन अस्त-व्यस्त

दार्जिलिंग
Image caption हड़ताल की वजह से काम-काज प्रभावित हुआ है

एक अभियुक्त के पुलिस हिरासत से फ़रार होने के विरोध में दार्जिलिंग में राजनीतिक पार्टियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का आह्वान किया है.

ग़ौरतलब है कि ऑल इंडिया गोरखा लीग (एआईजीएल) के वरिष्ठ नेता मदन तमांग की हत्या के आरोप में निकोल तमांग को 16 अगस्त को गिरफ़्तार किया गया था और वे रविवार को फ़रार हो गए थे.

21 मई को एआईजीएल के चेयरमैन मदन तमांग की हत्या दार्जिलिंग में उस वक़्त सरेआम कर दी गई थी जब वे पब्लिक मीटिंग का बंदोबस्त कर रहे थे.

इस हड़ताल की वजह से दार्जिलिंग में सामान्य जीवन अस्त-व्यस्त है.

जीजेएम का कहना है कि वे तब तक हड़ताल जारी रखेंगे जब तक निकोल तमांग मिल नहीं जाते.

मोर्चा ने आरोप लगाया है कि पुलिस ग़ैर क़ानूनी तरीक़े से अभियुक्त से निपटना चाहती है. हालांकि स्थानीय पुलिस इस आरोप का खंडन कर रही है.

दूसरी तरफ़ एआईजीएल ने भी अनिश्चितकालीन हड़ताल का आह्वान किया है. लीग का आरोप है कि पुलिस ने जान बूझ कर निकोल तमांग को क़ैद से जाने दिया ताकि जीजेएम को ख़ुश किया जा सके.

हड़ताल की वजह से बाज़ार और दुकानें बंद हैं और सड़कें सूनसान पड़ी है.

चाय बागानों के लिए मशहूर दार्जिलिंग के बगानों में भी इस हड़ताल की वजह से काम काज प्रभावित हुआ है.

आरोप

निकोल तमांग गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के नेता हैं. उन्हें 16 अगस्त को दार्जिलिंग स्थित उनके पैतृक निवास से गिरफ़्तार किया गया था.

निकोल तमांग पर आरोप है कि वो अखिल भारतीय गोरखा लीग के चेयरमैन मदन तमांग की हत्या में शामिल हैं. उन्हें गोरखा जनमुक्ति मोर्चा सुप्रीमो बिमल गुरंग का नज़दीकी माना जाता है.

पुलिस का कहना है कि निकोल तमांग हत्या करने के बाद नेपाल भाग गए.

हत्या की जांच कर रही पश्चिम बंगाल सीआईडी ने 16 अगस्त को निकोल तमांग को हिरासत में ले लिया था. सीआईडी दार्जिलिंग के पिंतैल गांव में स्थित एक कैंप में रखकर उनसे पूछताछ कर रही थी.

पश्चिम बंगाल सीआईडी के महानिदेशक नीरज नयन पांडे ने कहा, "हमने कई जगहों पर उनकी तस्वीरें भेजी हैं और उन्हें पकड़ने की सभी कोशिशें जारी हैं. हिरासत से भागने के कारणों की हम पड़ताल कर रहे हैं."

पश्चिम बंगाल की वामपंथी सरकार भारत सरकार पर दबाव डाल रही है कि गोरखालैंड बनाने के मसले पर बातचीत के लिए आल इंडिया गोरखा लीग और डेमोक्रेटिक फ्रंट को भी वार्ता में शामिल किया जाए.

अभी तक इस मसले पर चल रही बातचीत में सिर्फ़ तीन पक्ष ही शामिल हैं- भारतीय गृह मंत्रालय, पश्चिम बंगाल सरकार और गोरखा जनमुक्ति मोर्चा.

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