कश्मीर के लिए घातक हथियार

गोलीयां
Image caption कश्मीर में प्रदर्शनकारियों से निपटने के नए उपाय

भारत प्रशासित जम्मू कश्मीर में पिछले ढाई महीने से जारी प्रदर्शन को दबाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कश्मीर पुलिस को आधुनिक अमरीकी हथियार मुहैया कराए हैं.

सरकार का दावा है कि इन हथियारों के इस्तेमाल से बिना किसी जानमान के नुक़सान के प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने में आसानी होगी.

लेकिन पृथकतावादियों और विपक्ष का इल्ज़ाम है कि सरकार ने सामान्य राइफ़लों से भी ज़्यादा घातक हथियारों का इस्तेमाल शुरू किया है.

श्रीनगर के सबसे ज़्यादा संवेदनशील इलाक़े उत्तरी ज़ोन (डाउन टाउन) के पुलिस अधिक्षक शौकत हुसैन शाह ने बीबीसी को बताया कि पिछले हफ़्ते दो ख़ास विमानों के ज़रिए हथियारों की बड़ी खेप दिल्ली से श्रीनगर लाई गई है.

प्रसिद्ध अमरीकी हथियार बनाने वालों के इन हथियारों में सबसे ख़तरनाक पंप एक्शन गन या पीएजी है जिसकी बनावट आम शिकारी बंदूक़ की तरह की होती है.

पीएजी में इस्तेमाल होने वाले हर कारतूस में अत्यधिक कड़ी प्लास्टिक की 30 गोटियां होती हैं जो फ़ायर करने पर निशाने के क़रीब बीस फ़ीट के क्षेत्रफल में बिखर जाती हैं.

पीएजी

Image caption हाल ही में इसकी दो खेप दिल्ली से श्रीनगर लाई गई है.

पीएजी का इस्तेमाल करने वाले पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ये बंदूक़ 300 फ़ीट तक अपना निशाना बना सकती है लेकिन अगर 90 फ़िट से कम दूरी से फ़ायर करने पर इसकी चपेट में आने वाल व्यक्ति मर भी सकता है.

एसपी शौकत शाह का कहना है कि इस बंदूक़ के इस्तेमाल से उत्तरी कश्मीर में प्रदर्शन रोकने में पुलिस को काफ़ी मदद मिली है.

पीएजी के इस्तेमाल पर पुलिस और सरकार दोनों की काफ़ी आलोचना हो रही है.

विपक्ष की नेता महबूबा मुफ़्ती ने कहा कि पीएजी दरअसल जंगली दरिंदों को मारने के लिए इस्तेमाल होता है और यही बंदूक़ अब कश्मीर के शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर इस्तेमाल की जा रही है.

याद रहे कि पिछले दिनों सोपोर में एक युवक की मौत पीएजी फ़ायर से हुई थी. पृथकतावादियों का इल्ज़ाम है कि फ़लस्तीन में इसराइली फ़ौज भी यही बंदूक़ इस्तेमाल करती है.

स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉक्टर अरशद कावोसा ने बताया,'' गोली तो एक जगह लगती है और ऑपरेशन के ज़रिए निकाली जा सकती है लेकिन पीएजी टुकड़े पूरे शरीर में होते हैं और ऐसे में ज़ख़्मी व्यक्ति के शरीर पर दसियों जगह ऑपरेशन करने होंगे. ये हथियार घातक है.

पीबीएल

Image caption इस गन की चपेट में आने वाले को बिजली का झटका लगता है और वह बेहोश हो जाता है.

दरअसल ये एक और प्रकार की बंदूक़ है जिसमें लाल और काली मिर्च और दूसरे तत्व से बनाई गई गोटियों का इस्तेमाल होता है.

ये बंदूक़ गैस की मदद से उन गोटियों को फोड़ती है जिससे काले घने धुएं के बादल पैदा हो जाते हैं और हजूम में शामिल लोगों का दम घुटने लगता है और आंखों के सामने अंधेरा छा जाता है.

इस बंदूक़ को पेपर बॉल लॉंचर यानी पीबीएल कहते हैं और ये कार्बन डाइ ऑक्साइड की मदद से फ़ायर करती है.

टीज़र एक्स-26 एक पिस्तौल की तरह की गन है जिसमें तांबे के तार के छल्ले प्रयोग होते हैं.

अंग्रेज़ी के अक्षर डब्लू की तरह के छल्ले गोली की रफ़्तार से ही चलते हैं. गैस के दबाव से फ़ायर होने वाले तांबे के इन छल्लों में वेग पैदा होता है और जो इसकी चपेट में आ जाता है उसे ज़बर्दस्त बिजली का झटका लगता है और वह बेहोश हो जाता है.

पुलिस अधिकारी शौकत का कहना है कि यह बंदूक़ घायल करने के लिए नहीं है बल्कि उग्र प्रदर्शनकारी को गिरफ़्तार करने के लिए है. फिर भी इस प्रकार की बंदूक़ के बारे में विशेषज्ञों का कहना है कि 21 फ़ीट से कम दूरी से फ़ायर करने से इसकी चपेट में आने वाला मर भी सकता है.

कश्मीर में 11 जून से जारी प्रतिरोध को दबाने के लिए कश्मीर सरकार ने फ़ौज को भी तलब किया था.

इस दौरान प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी का सिलसिला जारी है जिसमें अब तक 63 लोग मारे जा चुके हैं और बहुत से घायल लोगों का कश्मीर के अस्पतालों में इलाज चल रहा है.

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