रक्षा बंधन के दिन बहनों को ख़ास तोहफ़ा

रंग बिरंगी राखियां
Image caption पूरे भारत में राखी का त्योहार बड़े जोश के साथ मनाया जाता है.

भाई बहन के अनमोल रिश्तों के त्योहार पर राजस्थान में बहनों को राखी के दिन सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा की सौग़ात मिली है.

रक्षा बंधन के दिन बहनें राज्य भर में हर श्रेणी की सरकारी बस में मुफ्त सफर कर रही हैं.

उधर बहनें शेखावाटी में भारतीय सेना में काम करते वतन के लिए शहीद सैनिकों की प्रतिमाओं को राखी का धागा बाँध अपने दिवंगत भाइयों को याद कर रही हैं. लेकिन धरती को बांटती सरहद राज्य के सीमावर्ती ज़िलों में भाई बहनों के बीच दीवार बन कर खड़ी है.

रोडवेज़ का तोहफ़ा

राज्य सरकर ने इस बार रोडवेज़ बसों में बहनों के लिए रक्षा बंधन पर मुफ्त यात्रा की सुविधा देने का ऐलान किया है.

जयपुर जैसे शहर में जहा अत्याधुनिक लो फ्लोर बसें चलती हैं ,बहने आज बिना किराया दिए यात्रा कर भाइयों तक पहुंच रहीं हैं.

रोडवेज़ की बसों में हर रोज़ यात्रा करने वालो में कोई तीस फ़ीसद महिलाएं होती हैं.

मगर आज तो जैसे बहनों का दिन हो. हर बस में उल्लासित बहनें सफ़र कर रही हैं. रोडवेज़ ने बढ़े हुए यात्री को देखते हुए अतिरिक्त बसों का इंतज़ाम किया है.

उधर राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र में शहीदों की बुतों पर मेले लगे है.

रक्षा बंधन के दिन बहनें अपने उन जांबाज़ भाइयों की प्रतिमाओ पर फेरी लगाती हैं और तिलक कर राखी का धागा बांधती है,जो अलग अलग समय वतन के लिए मर मिटे. शेखावाटी वो भू भाग है जो सदियों से भारतीय सेना को अपने बेटे सैनिक बनने के लिए देता रहा है.

इसीलिए वहा चप्पे चप्पे पर शहीदों के मुज्समे बहादुरी की दास्ताँ सुनाते मिलते है.

पाकिस्तान से आए लोगों की दिक़्क़तें

राज्य के सीमावर्ती ज़िलो में पाकिस्तानी नागरिकों को जाने की अनुमति नही मिलती है.लिहाज़ा जब भी कोइ भाई या बहन पाकिस्तान से यहाँ आते हैं,उनको पड़ोस के ज़िलो तक महदूद होकर रह जाना पड़ता है.

सरहद के उस पार उमर कोट,मीठी,मीरपुर खास ,हैदराबाद और कराची में हिन्दू आबाद है.मगर वो जब अपने भाई बहनों से मिलने भारत आते हैं तो उन्हें राजस्थान के सरहदी जिलो बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर और गंगानगर ज़िलो में जाने की इजाज़त नहीं मिलती.

पाकिस्तान से आए एक हिन्दू ने नाम ना उजागर करने की शर्त पर कहा-ये कैसा इंसाफ है, भारत के पंजाब और जम्मू कश्मीर में ऐसी कोई पाबन्दी नहीं है.

राजस्थान के सरहद के इन ज़िलो में कभी अशान्ति नहीं रही, ना कभी मज़हब की आधार पर ख़ून बहा ,लेकिन यहाँ पाकिस्तान से आने वाले हिन्दुओ को जाने की अनुमति नहीं है. तीज त्योहार पर कोई हिन्दू आता है तो वो पास के दूसरे ज़िले में किसी होटल में वक़्त गुज़ारता है.

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