हज़ारों किसानों की नए भू-अधिग्रहण क़ानून की माँग

  • 26 अगस्त 2010
किसान रैली

दिल्ली से आगरा को जोड़ने वाले एक्सप्रेसवे के लिए भू-अधिग्रहण का विरोध कर क़रीब दस हज़ार किसानों ने गुरुवार को दिल्ली में विरोध प्रदर्शन किया और भूमि-अधिग्रहण के नए क़ानून की माँग की है.

चाहे रैली का नेतृत्व राष्ट्रीय लोकदल के अजीत सिंह कर रहे थे लेकिन इसमें विपक्ष के विभिन्न नेताओं ने किसानों का समर्थन किया और रैली में भाग लिया .

दिल्ली में सुबह से ही मानो किसानों का सैलाब आने लगा था और बसों और ट्रकों के ज़रिए हज़ारों किसान केंद्रीय दिल्ली के जन्तर-मन्तर में पहुँचने शुरु हो गए थे.

ग़ौरतलब है कि किसान पिछले कई हफ़्तों से मथुरा, अलीगढ़ और आगरा सहित अनेक स्थानों पर आंदोलन कर रहे हैं और इस परियोजना के ली जा रही ज़मीन का मुआवज़ा बढ़ाने की माँग कर रहे हैं. कई किसानों का कहना है कि वे अपनी ज़मीन देना ही नहीं चाहते.

इसी आंदोलन के हिंसक हो जाने के बाद गत 14-15 अगस्त को सुरक्षा बलों की गोली से कम से कम तीन किसानों की मौत हो गई थी.

कई विपक्षी दल एक मंच पर

बीबीसी ने किसानों की राय जानने के लिए अनेक किसानों से रैली के दौरान बातचीत की. अधिकतर किसानों का कहना था कि वो जानते हैं कि विकास के लिए उन्हें शायद ज़मीनें देनी ही पड़े पर ऐसा उनकी सहमति के साथ ही होना चाहिए.

मुरादाबाद से आए विजेंदर सिंह ने बताया, "हमारी ज़मीन उतनी ही उपजाऊ है जैसी दिल्ली या नौएडा की ज़मीन. हम चाहते हैं कि सरकार ज़मीन की दर यानि मुआवज़ा हमसे बातचीत करके तय करे."

Image caption बुधवार को आगरा के पास आंदोलनकारियों ने अपनी नाराज़गी कुछ इस तरह से जताई थी

अजीत सिंह, जिनके रैली स्थल के चारों और बड़े-बड़े पोस्टर लगाए गए, बोले, "कल राहुल गांधी प्रधानमंत्री से मिले तो उन्हें आश्वासन मिला था कि भूमि-अधिग्रहण का नया कानून अगले संसद सत्र में लाया जाएगा. हम पिछले हफ़्ते प्रधानमंत्री से मिले तो हमें तो कुछ नहीं कहा गया. अब वो सिर्फ़ राहुल गांधी के प्रधानमंत्री तो नहीं हो सकते."

उनके अलावा भारतीय जनता पार्टी के अरुण जेटली, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के एबी बर्धन, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) की ब्रिंदा कारत, लोक जनशक्ति पार्टी के राम बिलास पासवान और जनता दल (यू) के शरद यादव भी रैली में पहुँचे और किसानों को संबोधित किया.

यहाँ तक कि डीएमके (द्रविड़ मुनेत्र कषगम), एआईएडीएमके (अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम) और अकाली दल के प्रतिनिधि भी मंच पर मौजूद थे.

सभी नेताओं ने किसानों की मांगों का समर्थन किया और भूमि-अधिग्रहण विधेयक के प्रस्ताव के संसद में पेश होने पर सहयोग करने का भी आश्वासन दिया.

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