भारी बारिश से चारमीनार को नुक़सान

चारमीनार
Image caption चारमीनार हैदराबाद की पहचान मानी जाती है

हैदराबाद नगर की पहचान मानी जाने वाली ऐतिहासिक इमारत चारमीनार को तूफ़ानी बारिश से नुक़सान पहुँचा है. इससे लोगों में बेचैनी है.

रविवार रात लगातार कई घंटों की भारी बारिश के कारण चारमीनार की एक मीनार की दूसरी मंजिल से कुछ मलबा टूट कर नीचे गिर गया जिसके बाद इलाक़े में दहशत फैल गई और चार सौ वर्ष पुराने इस भवन की सुरक्षा को लेकर अफ़वाहें चल निकलीं. पुलिस अधिकारियों ने बताया कि दक्षिण-पूर्व छोर की मीनार के कुछ कंगूरे अचानक टूट गए.

मलबे का कुछ हिस्सा वहां से गुजरती हुई एक कार पर भी गिरा और लोग डरकर भाग खड़े हुए.

इस स्थिति को देखते हुए पुलिस ने उस जगह को घेर लिया और व्यस्त सड़क का ट्रैफिक रोक दिया. लेकिन बाद में अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि चारमीनार को कोई नुक़सान नहीं पहुँचा है और उसका ढांचा सुरक्षित है.

राज्य के पुरातत्व विभाग के निदेशक चन्ना रेड्डी ने कहा कि केवल ऊपरी नुक़सान पहुँचा है जिसकी मरम्मत की जा सकती है.

'सतही नुक़सान'

इससे पहले पश्चिमी छोर की मीनार का एक बड़ा टुकड़ा भी इसी तरह टूट कर गिर पड़ा था. इन घटनाओं ने चारमीनार की सुरक्षा पर प्रश्न चिन्ह लगा दिए हैं और स्थानीय लोग सरकारी अधिकारियों पर आरोप लगा रहे हैं कि वो इस मामले में लापरवाही बरत रहे हैं. हर रोज़ हजारों पर्यटक चारमीनार को देखने आते हैं और उन्हें केवल पहली मंजिल पर चढ़ने की अनुमति दी जाती है.

ये ऐतिहासिक इमारत 1591 में मोहम्मद क़ुतुब शाह ने बनवाई थी और ये विश्व में अपनी तरह का एक अलग स्मारक माना जाता है. दूसरी ओर रविवार रात की तूफ़ानी बारिश में पुराने हैदराबाद में एक घर के गिर जाने से एक ही परिवार के तीन बच्चों की मौत हो गई.

अधिकारियों का कहना है कि एक नाले के किनारे बना यह कच्चा घर रात 11 बजे गिर गया और तीन बच्चे मलबे में दब गए.

परिवार के प्रमुख यूसुफ़ एक ऑटो ड्राइवर हैं. वो, उनकी पत्नी और चार बेटियाँ भी इस घटना में घायल हो गए हैं.

गत दो सप्ताह से चल रही बारिश के कारण हैदराबाद के कुंड पूरी तरह भर गए हैं.

हैदराबाद के बीचों बीच स्थित हुसैन सागर झील भी भर गई है और उससे भी पानी छोड़ा जा रहा है.

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