नक्सली मुठभेड़ में सात पुलिसकर्मियों की मौत

माओवादी लड़ाके
Image caption मुठभेड़ के दौरान दोनों ओर से गोलीबारी हुई

बिहार पुलिस का कहना है कि लखीसराय ज़िले में नक्सलियों से हुई मुठभेड़ में सात पुलिसकर्मी मारे गए हैं जबकि चार पुलिसकर्मी लापता हैं.

राज्य के पुलिस महानिदेशक नीलमणि ने बताया, "ज़िले के कजरा पहाड़ी क्षेत्र में घटनास्थल से सातों शव बरामद कर लिए गए हैं. " वहीं लखीसराय के जिलाधिकारी मनीष कुमार का कहना है कि मुठभेड़ में शामिल चार पुलिसकर्मियों का अभी भी पता नहीं चल पाया है.

उधर जमुई से माकपा (माओवादी) के प्रवक्ता अविनाश ने बीबीसी को फ़ोन कर इन पुलिसकर्मियों को बंधक बना कर रखने का दावा किया है. उन्होंने कहा, "ये कार्रवाई ऑपरेशन ग्रीन हंट के ख़िलाफ़ हुई है और इसमें सात पुलिसकर्मियों को मौत के घाट उतारा गया है और चार को बंधक बना कर रखा है."

उन्होंने धमकी दी कि यदि केंद्र और राज्य सरकार जल्दी ही नक्सलियों के ख़िलाफ़ अभियान नहीं रोकेगी तो बंधक बनाए गए पुलिसकर्मियों को मार दिया जाएगा.

ग़ौरतलब है कि इस इलाक़े में रविवार की सुबह नक्सलियों और पुलिस के बीच शुरु हुई मुठभेड़ रविवार देर रात तक चली.

मृतक पुलिसकर्मियों में स्थानीय कबैया पुलिस स्टेशन प्रभारी बीपी यादव और बिहार मिलिट्री पुलिस के छह जवान शामिल हैं.

उधर बिहार सरकार ने मुठभेड़ में मारे गए पुलिसकर्मियों के निकट संबंधियों को दस लाख रुपए मुआवाज़ा देने की घोषणा की है.

इस मुठभेड़ स्थल से भाग कर आए कुछ पुलिस जवानों ने सूचना दी कि नक्सली आमने-सामने की दो पहाड़ियों से गोली चला रहे थे और पुलिस के लोग बीच के मैदान में फँसे हुए थे.

घायलों का इलाज

इस मुठभेड़ में घायल आठ में से सात पुलिसकर्मियों का इलाज पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चल रहा है.

इससे पहले वहाँ से घायल लौटे चार जवानों में से एक ने पत्रकारों को बताया था, "हम लोग तो भागकर चले आए लेकिन जो लोग आगे निकल गए थे उनका पता नहीं है."

जहाँ मुठभेड़ हुई है, वह इलाक़ा तो लखीसराय ज़िले का है लेकिन इससे जमुई और मुंगेर ज़िले की सीमा भी लगती है.

इन तीनों ज़िलों से बड़ी संख्या में सीआरपीएफ़, बिहार कोबरा पुलिस और स्पेशल टास्क फ़ोर्स के जवानों को मुठभेड़ स्थल की ओर रवाना किया गया है.

रविवार की दोपहर ही नक्सलियों ने शिवहर ज़िले के तरियानी अंचल में प्रखंड विकास अधिकारी यानी बीडीओ मनोज कुमार सिंह का अपहरण कर लिया.

नक्सलियों का कहना है कि गत 23 मार्च को बेलसंड अनुमंडल में महंगाई विरोधी मंच की एक रैली के बाद जिन 12 निर्दोष लोगों को गिरफ़्तार किया था, उन्हें जब तक नहीं छोड़ा जाएगा, बीडीओ को भी नहीं छोड़ा जाएगा.

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