अमेठी में नए ज़िले को हरी झंडी

राहुल गांधी
Image caption कांग्रेस ने अपने महासचिव के चुनाव क्षेत्र में होने जा रही इस फ़ेरबदल को ज़्यादा तरजीह नहीं दी है

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के स्थगन आदेश को रद्द करते हुए उत्तरप्रदेश सरकार को अमेठी लोकसभा क्षेत्र में एक नए ज़िले के गठन को अनुमति दे दी है.

इसे मायावती सरकार के लिए एक राजनीतिक जीत की तरह देखा जा रहा है क्योंकि अमेठी राहुल गांधी का लोकसभा क्षेत्र है और वे उत्तरप्रदेश में कांग्रेस को पुनर्जीवित करने की पुरज़ोर कोशिश कर रहे हैं.

जानकार कह रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले से जहाँ राहुल गांधी और मायावती के बीच नोंकझोंक बढ़ेगी वहीं अमेठी के पूर्व राजा और सुल्तानपुर से कांग्रेस सांसद संजय सिंह कह रहे हैं कि यदि कांग्रेस की सरकार आई तो ज़िले का नाम फिर बदल दिया जाएगा.

मायावती सरकार अमेठी में एक नए ज़िले का गठन करना चाहती है जिसका नाम छत्रपति साहूजी महाराज रखने का फ़ैसला किया गया है.

फ़ैसला

Image caption मायावती ने वर्ष 2003 में भी इस ज़िले के गठन का प्रयास किया था

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को दिए अपने फ़ैसले में इस नए ज़िले के गठन पर लगी रोक को हटा दिया है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट की रोक को रद्द करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हाईकोर्ट को रोक लगाने से पहले अपने ही एक फ़ैसले पर एक नज़र डाल लेनी चाहिए थी.

इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक पीठ ने 11 अगस्त को उस याचिका को ख़ारिज कर दिया था, जिसमें अमेठी लोकसभा क्षेत्र में एक नए ज़िले के गठन के मायावती सरकार के फ़ैसले को चुनौती दी गई थी.

लेकिन 18 अगस्त को इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक और पीठ ने इस फ़ैसले पर मार्च 2011 तक के लिए रोक लगा दी थी.

इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था.

मायावती सरकार ने पहली जुलाई को नए ज़िले के गठन की अधिसूचना जारी की थी.

राजनीतिक मामला

अमेठी नेहरू-गांधी परिवार के लिए ख़ासा महत्व रखता है.

यहाँ से संजय गाँधी, राजीव गाँधी और सोनिया गाँधी लोकसभा के लिए चुने जा चुके हैं.

रायबरेली और सुल्तानपुर ज़िलों की कुछ तहसीलें लेकर अमेठी लोकसभा क्षेत्र में छत्रपति साहूजी महाराज ज़िले के गठन का प्रस्ताव है.

हालांकि कांग्रेस इस मामले को तूल नहीं दे रही है लेकिन मायावती सरकार के इस फ़ैसले को नेहरू-गांधी परिवार के राजनीतिक गढ़ पर हमले के रुप में देखा जा रहा है.

सुल्तानपुर के कांग्रेस सांसद संजय सिंह कहते हैं, "यह मायावती की मानसिकता का परिचायक है. उन्होंने साहूजी महाराज के नाम से ज़िला बनाने का निर्णय लिया है जबकि साहूजी महाराज का ना तो इस क्षेत्र से लेना देना है और न इस प्रदेश से. यह वोट बैंक की राजनीति है."

उनका कहना है, "अमेठी का अपना महत्व है और जब कांग्रेस सत्ता में लौटी तो हम फिर से इसका नाम बदल देंगे."

हालांकि यह पहली बार नहीं है कि मायावती ने छत्रपति साहूजी महाराज के नाम पर ज़िला बनाने की कोशिश की हो.

इससे पहले वर्ष 21 मई 2003 में उन्होंने यह फ़ैसला किया था लेकिन उसके बाद सत्ता संभालने आए मुलायम सिंह ने इसी वर्ष नवंबर में इस फ़ैसले को रद्द कर दिया था.

मायावती के फ़ैसले को चुनौती देने वाली याचिका में कहा गया था कि इससे जनगणना का कार्य प्रभावित होगा लेकिन सरकार की ओर से कहा गया है कि इससे किसी का भी काम प्रभावित नहीं होगा.

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