वाईएसआर की पहली पुण्यतिथि

वाईएसआर के समर्थक

वाईएसआर के नाम से मशहूर आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी को गुरुवार को उनकी पहली पुण्यतिथि पर उनके प्रशंसकों ने याद किया.

पिछले साल दो सितंबर को एक हेलिकॉप्टर दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई थी.

इस अवसर पर उनके गृहनगर कडप्पा के इदुपुलापाया में स्थित उनकी समाधि पर श्रद्धांजलि देने हज़ारों लोग पहुँचे.

मूर्ति का अनावरण

उनकी पत्नी और विधायक विजयलक्ष्मी, पुत्र और सांसद वाईएस जगन्मोहन रेड्डी और कई अन्य नेता शामिल थे.

कुरनूल ज़िले के नल्लामल्ला के जंगलों में जहाँ रेड्डी का हेलिकाप्टर दुर्घटनाग्रस्त हुआ था, वहाँ लगाई गई वाईएसआर की 20 फुट ऊँची कांसे की मूर्ति का अनावरण किया गया.

हैदराबाद में राज्य सरकार ने एक सरकारी समारोह आयोजित कर पूर्व मुख्यमंत्री को श्रद्धांजलि दी. इस मौक़े पर एक विशेष डाक टिकट जारी किया गया.

गुरुवार को ही राज्य भर में लगाई गईं वाईएसआर की कई मूर्तियों का अनावरण किया गया.

वे राज्य के लोकप्रिय नेताओं में से एक थे. समाज के कमज़ोर तबके के लिए चलाई गईं कल्याण योजनाओं के जरिए उन्होंने ग़रीबों के दिलों में ख़ास जगह बनाई थी.

अपनी पार्टी कांग्रेस को शक्तिशाली बनाने और उसे दो बार सत्ता दिलाने में भी उन्होंने कामयाबी हासिल की थी.

कांग्रेस का कलह

उनकी मौत के बाद उनके पुत्र और कडप्पा से कांग्रेस सांसद जगन्मोहन रेड्डी को मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया. इससे उनके समर्थकों में गुस्सा है और वे बग़ावत पर उतर आए हैं.

ख़ुद को मज़बूत बनाने और लोगों की सहानभूति बटोरने के लिए जगन्मोहन रेड्डी ने "दिलासा यात्रा" शुरू की है.

वे कहते हैं कि यह कोई राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है बल्कि इसका उद्देश्य उन सैकड़ों परिवारों को दिलासा देना है जिनके सदस्यों ने वाईएसआर की मौत पर दुखी होकर या तो आत्महत्या कर ली थी या उनकी मौत हो गई थी.

वाईएसआर की मौत के बाद कांग्रेस के लिए दूसरा बड़ा संकट तेलंगाना राज्य की मांग के रूप में आया.

ऐसे में यह सवाल उठता है कि आखिर एक व्यक्ति की मौत से राज्य और कांग्रेस की स्थिति इतनी क्यों बिगड़ गई?

राजनीतिक विश्लेषक देवुलापल्ली अमर कहते हैं, ''दस साल तक वाईएसआर ने पूरी ताकत से आंध्र प्रदेश कांग्रेस को एक क्षेत्रीय दल की तरह चलाया. उनकी हर बात आखिरी मानी जाती थी. उनके विरुद्ध कोई आवाज़ नहीं उठा सकता था. लेकिन उनकी मौत के साथ ही दूसरा गुट सक्रिय हो गया. कोई बड़ा नेता न होने से पार्टी कमज़ोर पड़ गई.''

वहीं विधायक अनाम विवेकानंदा रेड्डी आम भावनाओं को प्रकट करते हुए कहते हैं कि वाईएसआर की मौत से पार्टी और सरकार में जो कमी आई है वह अब तक भरी नहीं जा सकी है, हालांकि मौजूदा मुख्यमंत्री रोसैया और दूसरे लोग उसकी कोशिश कर रहे हैं.

रोसैया की समस्या

मुख्यमंत्री रोसैया ने बीबीसी से बातचीत में माना कि उनमें करिश्में की कमी है. वे कहते हैं कि प्रशासन केवल करिश्मे से नहीं चलाया जा सकता. करिश्मा उन लोगों के लिए महत्व रखता है, जो करिश्मे की राजनीति करना चाहते हैं. जो लोग अच्छा प्रशासन चाहते हैं उनके सोचने का ढंग अलग होता है".

Image caption वाईएसआर ने कांग्रेस को आंध्र प्रदेश में मजबूत किया था.

इस घटनाक्रम से यह साफ़ है कि आज कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे कैसे एक प्रभावशाली नेतृत्व तैयार करें जो 2014 के चुनाव में पार्टी को सफलता के साथ आगे ले जा सके.

राजनीतिक विश्लेषक डी अमर का कहना था कि नेतृत्व की समस्या का हल इस बात से भी जुड़ा है कि क्या राज्य का बंटवारा हो जाता है?

वह कहते हैं, "अगर राज्य बंट जाता है तो तेलंगाना में कांग्रेस यह कहकर अगला चुनाव जीत सकती है कि उसने नया राज्य दिया है.''

अमर कहते हैं कि दूसरी ओर आंध्र और रायल सीमा में जगन्मोहन रेड्डी उसके लिए अच्छे नेता साबित हो सकते हैं. लेकिन आला कमान उनसे खुश नहीं है है.

कांग्रेस फिल्म अभिनेता चिरंजीवी और उनकी पार्टी प्रजा राज्यम का अपने में विलय कराकर उन्हें उभारना चाहती है.

आंध्र प्रदेश कांग्रेस के लिए अहम है. साल 2009 के चुनाव में उसे राज्य की 42 लोकसभा सीटों में से 33 सीटें मिली थीं.

अगर आंध्र प्रदेश कांग्रेस के हाथ से निकल जाता है तो 2014 में उसे फिर केंद्र की सत्ता दिलाने और राहुल गाँधी को प्रधानमंत्री बनाने का सपना पूरा नहीं में मुश्किल होगी.