बंधक पुलिसकर्मियों को छोड़ने की अपील

  • 4 सितंबर 2010
माओवादी
Image caption अभय यादव की पत्नी और परिवार मुख्यमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठे थे.

लखीसराय पुलिस मुठभेड़ के बाद बिहार में राजनीतिक पार्टियों की सर्वदलीय बैठक ने माओवादीयों से बंधक बनाए गए पुलिसकर्मियों को छोड़ने की अपील की है.

बैठक में प्रस्ताव भी रखा गया है कि राज्यसरकार के साथ सीधी बातचीत के लिए माओवादी अपने किसी अधिकृत प्रतिनिधि को भेजें और मुख्यमंत्री से आमने-सामने बात करें.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा, "हमारी अपील है कि माओवादी आपसी बातचीत के लिए आएं. बातचीत करने के लिए आने और लौटने में कोई पुलिस कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ेगा."

प्रमुख विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश अध्यक्ष अब्दुल बारी सिद्दीक़ी ने बताया कि माओवादियों से अपील किए जाने पर सारे प्रतिपक्षी दल सहमत हैं जबकि दूसरी ओर सीपीआई(एमएल) का कहना है कि ये बैठक सिर्फ़ एक धोखा है क्योंकि इस बैठक को बुलाने में देर की गई है.

माओवादियों के कब्ज़े में जो पुलिसकर्मी थे, उनके नाम हैं - अभय यादव, रुपेश कुमार, एहसान ख़ान और लुकास टेटे. शुक्रवार को लुकास टेटे का शव बरामद हुआ है.

इस बैठक में जनता दल यूनाईटेड, भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस, लोकजनशक्ति पार्टी और सीपीआई(एमएल) जैसी प्रमुख पार्टियां शामिल हुई थीं.

दो माओवादी ग़िरफ़्तार

इससे पहले शनिवार सुबह बिहार पुलिस के महानिदेशक नीलमणि ने बीबीसी को बताया कि बंदी बनाए गए पुलिसकर्मियों की तलाश में छेड़े गए अभियान के दौरान दो माओवादियों को गिरफ़्तार किया है.

गिरफ़्तार किए गए माओवादी हैं- पिंटूदा और बहादुर यादव.

पिंटूदा लक्ष्मीपुर, सिमुलतला जोकि जमुई ज़िले में आते हैं, वो वहाँ के क्षेत्रीय कमांडर हैं.

इन दोनों को जमुई जिले के बरहेट पुलिस थाना क्षेत्र में गुरुमाहा जंगल से गिरफ़्तार किया गया है.

पुलिस का कहना है कि इन दोनों ने पुलिसवालों के साथ हुई मुठभेड़ में जिसमें सात पुलिसकर्मी मारे गए, शामिल होने की बात स्वीकार की है.

दूसरी पुलिसकर्मियों को बंधक बनाए जाने पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने शनिवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई है.

विश्लेषकों का कहना है कि इस सर्वदलीय बैठक का कोई मतलब नहीं है क्योंकि इस मामले में काफ़ी देर हो चुकी है.

इधर केंद्र सरकार ने माओवादियों की खोज अभियान के लिए राज्य सरकार को दो हेलिकॉप्टर उपलब्ध कराए हैं.

इधर शुक्रवार को बिहार पुलिस ने इस बात की पुष्टि की है कि उसे लखीसराय में जो शव मिला है वह बिहार मिलिटरी पुलिस के हवलदार लुकास टेटे का है. ये उन चार पुलिसकर्मियों में थे जिन्हें माओवादियों ने बंदी बना लिया था.

इसके पहले माओवादियों ने दावा किया था कि उन्होंने सबइंस्पेक्टर अभय यादव को मार दिया था लेकिन उनका शव अभी तक नहीं मिला है इसलिए उनको लेकर आशा बनी हुई है.

माओवादियों ने सरकार को शुक्रवार भारतीय समयानुसार सुबह दस बजे तक का अल्टीमेटम दिया था. ये समय सीमा ख़त्म हो चुकी है.

बिहार की सरकार ने केंद्र सरकार से सुरक्षाबलों की 40 अतिरिक्त कंपनियों की मांग की थी.

लेकिन केंद्रीय गृह सचिव ने कहा है कि सुरक्षाबलों की कुछ और कंपनियाँ बिहार भेजी जा रही हैं. बिहार में पहले से ही केंद्रीय सुरक्षाबलों की 23 कंपनियाँ मौजूद हैं.

मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने माओवादियों से बातचीत की पेशकश भी की है पर स्पष्ट है कि सरकार ख़ासे दबाव में है.

मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने शुक्रवार सुबह एक मंत्री नरेंद्र सिंह को लखीसराय के घटनास्थल वाले इलाक़े में भेजा था लेकिन अब स्पष्ट नहीं है कि वे माओवादियों के साथ बातचीत की कोशिश करेंगे या उनका प्रयास असफल रहा है.

असंतोष

पर्यवेक्षकों के अनुसार गुरुवार को एक सबइंस्पेक्टर की माओवादियों द्वारा हत्या के दावे से जनता में असंतोष है और पुलिसकर्मियों की रिहाई के प्रयासों में हुई देरी और सरकार की रवैए से लोग संतुष्ट नहीं हैं.

हाल में लखीसराय में पुलिस और माओवादियों की मुठभेड़ के बाद माओवादियों ने चार पुलिसकर्मियों को बंदी बना लिया था और माँग रखी थी कि जेल में क़ैद उनके आठ सहयोगियों को रिहा किया जाए.

सरकार ने जहाँ एक ओर माओवादियों का सामना करने की केंद्र की नीति से असहमति जताई थी वहीं राज्य के पुलिसकर्मियों को रिहा कराने के लिए उसकी ओर से ऐसी पहल नहीं हुई जिसकी उम्मीद की जा सकती थी.

सरकार पर दबाव न केवल जनता की ओर से है बल्कि राज्य में विपक्षी दलों के नेता लालू यादव और रामविलास पासवान की ओर से भी है जिन्होंने इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की माँग की थी.

उधर भाजपा ने कहा है कि समय कार्रवाई करने का है बातचीत करने का नहीं.

'सरकार ने बात नहीं की'

माओवादियों के प्रवक्ता अविनाश ने बीबीसी के पटना दफ़्तर में गुरुवार को फ़ोन कर कहा था, " सरकार ने हमारे साथ बातचीत करने की कोई कोशिश नहीं की और ये माना कि हम केवल धमकी दे रहे हैं. एक जन अदालत में फ़ैसला हुआ और हमने पुलिसकर्मियों में से एक का सफ़ाया कर दिया है. यदि कल सुबह दस बजे तक इस बारे में सरकार बातचीत नहीं करती तो बाक़ी तीन के बारे में फ़ैसला लिया जाएगा."

राज्य के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने कहा है वो नहीं जानते हैं कि दावा सही है या नहीं लेकिन वो चाहेंगे कि ये सही नहीं हो.

उनका कहना था, " इन चार पुलिसवालों का क्या कसूर है? किसी को बंधक बनाकर मोल तोल करना मेरी समझ से उच्च आदर्श का परिचायक नहीं है."

उन्होंने राज्य और देश के बुद्धिजीवियों से अपील की है कि वो इस मामले पर बात करें.

उनका कहना था, " हमारी परिधि लोकतंत्र है और हमने कोशिश की है उसे निभाने की."

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