बंधक पुलिसकर्मियों की रिहाई का इंतज़ार

  • 5 सितंबर 2010
फ़ाइल फ़ोटो
Image caption माओवादी प्रवक्ता ने कहा कि रविवार सुबह बंधक बनाए गए पुलिसकर्मी छोड़ दिए जाएंगे.

बिहार में बंधक बनाए गए पुलिसकर्मियों की रिहाई का उनके परिजनों और पुलिस-प्रशासन को इंतज़ार है.

इसके पहले माओवादियों ने घोषणा की थी कि बंधकों को रविवार को रिहा कर दिया जाएगा.

माओवादी नेता अविनाश से बातचीत सुनिए

माओवादी प्रवक्ता अविनाश ने बीबीसी टेलीफ़ोन पर कहा था, " बंदी पुलिसकर्मियों के परिजनों के साथ-साथ देश के कई बुद्धिजीवियों, मानवाधिकार संगठनों, महाश्वेता देवी और स्वामी अग्निवेश जैसे शुभचिंतकों के अनुरोध पर इन्हें हम छोड़ रहे हैं. लेकिन हम इन्हें रिहा करके सरकार या पुलिस को नहीं, बल्कि इनके परिवार वालों को सौंपेंगे."

उनसे ये पूछा गया कि दो दिन पहले जिस बंधक पुलिसकर्मी को मार दिए जाने की सूचना माओवादियों की तरफ़ से आई थी, वो ग़लत क्यों साबित हुई.

इस पर अविनाश ने कहा, " ज़ोनल कमेटी के संबंधित फ़ैसले की सूचना मेरे पास जिस टेलीफ़ोन के ज़रिए आई थी वो लाइन ख़राब थी इसलिए ठीक से नहीं सुन पाने के कारण मीडिया को सूचना देने में मुझसे बड़ी भूल हो गई. इस भूल को लेकर मैंने मीडियाकर्मियों से माफ़ी भी मांग ली है."

'माओवादी नहीं, आम लोग'

शनिवार को दो माओवादियों की गिरफ्तारी के बारे में उन्होंने कहा कि सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन ने लक्ष्मीपुर नामक एक ग्रामीण बाज़ार से दो आम लोगों को गिरफ़्तार कर लिया और झूठी घोषणा कर दी कि हेलिकॉप्टर से जंगल के एक गांव में पैराशूट के ज़रिए जवानों को उतारकर दो माओवादियों को पकड़ लिया गया है.

प्रवक्ता अविनाश ने कहा, " उनसे ये ज़बरदस्ती क़बूल करवाया कि दोनों लखीसराय मुठभेड़ मामले में शामिल थे."

इससे पहले शनिवार सुबह बिहार पुलिस के महानिदेशक नीलमणि ने बीबीसी को बताया कि बंदी बनाए गए पुलिसकर्मियों की तलाश में छेड़े गए अभियान के दौरान दो माओवादियों को गिरफ़्तार किया है.

पुलिस के मुताबिक गिरफ़्तार किए गए माओवादी हैं - पिंटूदा और बहादुर यादव. पिंटूदा लक्ष्मीपुर, सिमुलतला जोकि जमुई ज़िले से आते हैं, वो वहाँ के क्षेत्रीय कमांडर हैं. इन दोनों को जमुई जिले के बरहेट पुलिस थाना क्षेत्र में गुरुमाहा जंगल से गिरफ़्तार किया गया था.

पुलिस का कहना है कि इन दोनों ने पुलिसवालों के साथ हुई मुठभेड़ में जिसमें सात पुलिसकर्मी मारे गए, उसमें शामिल होने की बात स्वीकार की थी.

'बातचीत नहीं'

माओवादी प्रवक्ता ने मुख्यमंत्री के बातचीत के आमंत्रण को ढकोसला क़रार देते हुए राज्य सरकार से आमने-सामने किसी तरह की बातचीत से साफ़ इनकार कर दिया था.

इससे पहले शनिवार शाम पटना में हुई सर्वदलीय बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने इस मसले पर माओवादियों के प्रतिनिधि से आमने-सामने बातचीत की पेशकश की थी.

माओवादी प्रवक्ता अविनाश ने मारे गए पुलिसकर्मी लूकस टेटे के बारे में कहा कि वो हथियारबंद हमलावर बनकर आए थे इसलिए उन्हें, माओवादी प्रवक्ता के शब्दों में, 'रास्ते से हटाना पड़ा'.

प्रवक्ता ने आगे कहा, "और इस तरह नीतिश सरकार पर हमारे आठ साथियों को जेल से रिहा करने के लिए दबाव बनाने जैसी रणनीति अपनानी पड़ी."

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