धोनी 'कॉर्बेट' के ब्रांड एंबेसडर

  • 5 सितंबर 2010
धोनी और पोखरियाल
Image caption धोनी से पहले टॉम ऑल्टर कॉर्बेट कॉर्बेट के ब्रांड एंबेसडर रह चुके हैं

भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी विश्व प्रसिद्ध कॉर्बेट नेशनल पार्क के मानद वॉर्डन नियुक्त किए गए हैं और अब वो इस मशहूर पर्यटन स्थल के ब्रांड एम्बेसडर के तौर पर काम करेंगे.

जुलाई में देहरादून में ब्याह रचाने के बाद धोनी अपनी पत्नी साक्षी के साथ पहली बार देहरादून के दौरे पर हैं.

धोनी दंपत्ति उत्तराखंड के मूल निवासी हैं. देहरादून में धोनी की ससुराल है.

बताया जाता है कि धोनी दंपत्ति उसी रिसॉर्ट में रूके हैं जहां उनकी शादी हुई थी.

सूत्रों के अनुसार एक निजी टेलीविजन कंपनी के लिए बनाए जा रहे कार्यक्रम की शूटिंग में भाग लेने धोनी यहां आए हैं. मीडिया को इस कार्यक्रम से दूर ही रखा गया है.

धोनी ने रविवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक से मुलाकात की. जहां उन्हें ब्रांड एंबेसडर बनाने की घोषणा की गई.

मुख्यमंत्री निशंक ने कहा,”गर्व के साथ ये बताना चाहूंगा कि धोनी को कॉर्बेट नेशनल पार्क का ब्रांड एंबेसडर बनाया जा रहा है और वो राज्य के मानद वाइल्ड लाइफ वॉर्डन होंगे."

उन्होंने 2012 में कॉर्बेट नेशनल पार्क के 75 साल को धूमधाम से मनाने की भी घोषणा की. इस मौके पर धोनी ने 'सेव द टाइगर' की टी शर्ट पहन रखी थी. लेकिन मीडियाकर्मियों की लाख कोशिशों के बावजूद धोनी बाघ या वन्य जीवों के बारे में कोई संदेश देने को राज़ी नहीं हुए.

इसके पहले मशहूर अभिनेता टॉम ऑल्टर भी कॉर्बेट के ब्रांड एंबेसडर रह चुके हैं.

हाल ही में राज्य सरकार ने गंगा के लिये चलाए जा रहे स्पर्श गंगा अभियान के लिये हेमा मालिनी को ब्रांड एंबेसडर नियुक्त किया है.

धोनी को ब्रांड एंबेसडर बनाए जाने से कॉर्बेट नेशनल पार्क से जुड़े लोगों में काफ़ी उत्साह है.

रामनगर में कॉर्बेट विलेज के संचालक राजेश पंवार ने कहा, ”धोनी के प्रशंसकों की संख्या बहुत ज़्यादा है और उम्मीद है कि धोनी अपने प्रशंसकों के बीच बाघ और वन्य जीवों को बचाने की पहल करेंगे.”

सैलानियों को लुभाने के लिए

पिछले कुछ समय में कॉर्बेट नेशनल पार्क घूमने की दिलचस्पी लोगों में कम हुई है.

आंकड़ों के मुताबिक यहां आने वाले विदेशी सैलानियों की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है.

इसी वजह से धोनी के ज़रिए सरकार सैलानियों को वापस पार्क की ओर खींचना चाहती है.

जबकि इस अवधि में ही यहाँ सैलानियों को आकर्षित करने के लिये कॉर्बेट हेरीटेज ट्रेल, कॉर्बेट नेचर वॉक और इको टूरिज्म जैसी कई नए पैकेज शुरू किए गए.

ये भी माना जा रहा है कि कॉर्बेट के प्रवेश शुल्क में जिस तरह चार गुनी बढ़ोत्तरी की गई है उससे भी यहाँ आनेवाले लोग हतोत्साहित हुए हैं.

बहरहाल देश के जिन 39 स्थानों में प्रोजेक्ट टाइगर चलाया जा रहा है उनमें सबसे अधिक 164 बाघ कॉर्बेट में ही बताए जाते हैं.

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