सभी ग़रीबों को मुफ़्त अनाज संभव नहीं:मनमोहन

  • 6 सितंबर 2010
मनमोहन सिंह
Image caption प्रधानमंत्री ने संपादकों के साथ हुई बैठक में विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार खुलकर रखे

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गोदामों में पड़े अनाज को ग़रीबों को मुफ़्त में बाँटने के संबंध में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट को चाहिए कि वो नीति निर्धारण के मामलों में दख़ल न दे और इस मामले में सरकार को ही फ़ैसले लेने दे.

मनमोहन सिंह ने ये बातें देश के वरिष्ठ संपादकों के साथ हुई बैठक में कहीं.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अनाज गोदामों में प़डा सड़ रहा है और इसलिए सरकार को चाहिए कि वह इसे ग़रीबों में मुफ़्त में बाँट दे.

मनमोहन सिंह का कहना था कि तेंदुलकर समिति के मुताबिक़ देश में ग़रीबों की संख्या कुल आबादी के 37 प्रतिशत है. ऐसे में सब को मुफ़्त अनाज देना संभव नहीं है.

पिछले दिनों मीडिया लगातार ख़बर दिखाता रहा है कि देश के विभिन्न हिस्सों में गोदामों में रखा अनाज सड़ रहा है.

नक्सलवाद

बैठक में मौजूद वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ वरदराजन के अनुसार प्रधानमंत्री का कहना था कि नक्सलवाद लंबे अरसे से चली आ रही पेचीदा समस्या है और इसका हल आसानी से होने वाला नहीं है.

उनका कहना था कि अलग अलग राज्यों में इसका स्वरूप अलग अलग है.

मनमोहन सिंह का कहना था कि अपनी दोनों टाँगों पर चलते हुए ही सरकार को इससे निपटने की कोशिश करनी होगी.

उनका कहना था कि एक टाँग है विकास और दूसरी टाँग, क़ानून व्यवस्था.

प्रधानमंत्री ने राहुल गांधी के उन विचारों से सहमति व्यक्त की जिसमें उन्होंने कहा था कि दो भारत हैं, एक अमीरों का और एक ग़रीबों का. उनका कहना था कि ग़रीबों और अमीरों के बीच की खाई पाटनी होगी.

प्रधानमंत्री का कहना था कि पाकिस्तान में सत्ता चाहे किसी की भी हो, भारत के पास बातचीत के सिवाय कोई विकल्प नहीं है.

सिद्धार्थ वरदराजन के अनुसार प्रधानमंत्री का कहना था कि अगर जंग नहीं लड़ना चाहते हैं तो बातचीत ही एक विकल्प है.

मंत्रिमंडल

Image caption ग़रीबी-अमीरी पर राहुल गांधी के विचारों से मनमोहन सिंह भी सहमत थे

संपादकों के साथ अपनी बैठक में प्रधानमंत्री ने ये भी संकेत दिए कि सात नवंबर से शुरू होने वाले संसद सत्र से पहले वो अपने मंत्रिमंडल में फेरबदल करेंगे.

एक ही विषय पर मंत्रियों और पार्टी के सदस्यों की अलग-अलग राय पर उन्होंने कहा कि वे इसे ग़लत नहीं मानते क्योंकि 'कांग्रेस अपने आपमें एक आंदोलन है' जहाँ मतभिन्नता है. उनका कहना था कि ऐसा लोकतंत्र में होता ही है.

उन्होंने कहा कि किसी भी सरकार के लिए ज़रुरी है कि मंत्रिमंडल में समन्वय हो. उनका कहना था कि उनके मंत्रिमंडल में पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु के मंत्रिमंडल से ज़्यादा समन्वय है.

उन्होंने याद दिलाया कि जवाहरलाल नेहरु और सरदार पटेल के बीच लगभग हर दिन पत्रों का आदान प्रदान होता था और इसी तरह इंदिरा गांधी और मोरारजी देसाई के बीच मतभेद थे.

प्रधानमंत्री ने कहा है कि वे अपने मंत्रिमंडल में औसतन कम आयु के लोगों को लेना चाहते हैं. लेकिन उन्होंने सेवानिवृ्त्ति से इनकार किया है.

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