राजस्थान में सरकारी डॉक्टर हड़ताल पर

राजस्थान

राजस्थान के चार बड़े शहरों जयपुर, जोधपुर, उदयपुर और अजमेर में सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों के हड़ताल पर होने से मरीजों और उनके परिजनों को बहुत परेशानी हो रही है.

जोधपुर में सोमवार को ही कुछ बच्चों सहित 14 लोगों की मौत हुई है, लेकिन जोधपुर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य आरके आसरे का कहना है कि इन मौतों को डॉक्टरों की हड़ताल से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए.

जोधपुर के डॉक्टरों का आरोप है कि एक मरीज के कुछ रिश्तेदारों ने उन पर हमला कर दिया था और इसके बाद पुलिस ने उन पर लाठियाँ बरसाईं और कई डॉक्टरों को बेरहमी से पीटा.

इसके बाद शनिवार रात से ही जोधपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल के रेसीडेंट डॉक्टर हड़ताल पर चले गए थे और बाद में जयपुर, उदयपुर और अजमेर के डॉक्टर भी हड़ताल पर चले गए.

हड़ताल कर रहे रेसीडेंट डॉक्टरों के नेता डॉक्टर सौरव ने बीबीसी से हुई बातचीत में कहा कि डॉक्टरों के साथ आए दिन मारपीट होती रहती है और उनकी सुरक्षा का कोई इंतज़ाम नहीं है.

मरीज़ों को परेशानी

Image caption अस्पताल खाली दिखाई पड़ रहे हैं

हालांकि प्रशासन का दावा है कि आपातकालीन सेवाएँ जारी हैं और गंभीर रुप से बीमार हर मरीज को इलाज मिल रहा है.

लेकिन मरीजों का कहना है कि उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

जयपुर मेडिकल कॉलेज में एक मरीज ने कहा, "हम तो इन्हें भगवान समझ कर आए थे लेकिन यहाँ बहुत निराशा हुई."

कई जगह निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने भी सरकारी डॉक्टरों के समर्थन में हड़ताल रखी है और कई जगह दवा दुकानें भी बंद रखी गई हैं.

इससे मरीजों की परेशानी और बढ़ गई है.

चूंकि इन बड़े शहरों के सरकारी अस्पतालों पर आसपास की सारी आबादी निर्भर करती है इसलिए परेशानी बहुत ज़्यादा हो रही है.

राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने हड़ताल कर रहे डॉक्टरों से बात की है लेकिन कोई समझौता नहीं हो सका है.

प्रशासन का कहना है कि शनिवार को मरीजों के रिश्तेदारों और डॉक्टरों के बीच हुई झड़प के बाद जब पुलिस पहुँची तो डॉक्टरों ने पुलिस पर पथराव किया.

लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि पुलिस ने बेवजह डॉक्टरों को पीटा.

वे सुरक्षा के इंतज़ाम करने के अलावा लाठीचार्ज के लिए ज़िम्मेदार पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की माँग कर रहे हैं.

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