जाति जनगणना अगले साल अलग से

भारतीय
Image caption जाति के आधार पर जनगणना आख़िरी बार 1931 में हुई थी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जाति आधारित जनगणना को मंज़ूरी दे दी है और कहा है कि अगले साल जून से सितंबर के बीच घर-घर जाकर अलग से जाति जनगणना होगी.

मंत्रिमंडल के फ़ैसलों की जानकारी देते हुए गृहमंत्री पी चिदंबरम ने बताया कि सरकार ने अब जाति जनगणना को बायोमैट्रिक्स प्रक्रिया से अलग कर दिया है जिसे लेकर विपक्षी दलों ने कड़ी आपत्ति जताई थी.

बायोमिट्रिक जनगणना का दौर दिसंबर से शुरु होने की उम्मीद है. इसमें 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों की फ़ोटो, उंगलियों के निशान और आँखों की पुतलियों की तस्वीरें ली जाएँगी.

इस बीच सामान्य जनगणना की प्रक्रिया चलती रहेगी.

पी चिदंबरम ने इसके अलावा मंत्रिमंडल के कई अन्य महत्वपूर्ण फ़ैसलों की जानकारी दी.

जाति जनगणना

कई महीनों की बहस और अनिश्चितता के बाद आख़िर केंद्र के मंत्रिमंडल समूह ने जाति आधारित जनगणना को अगस्त में मंज़ूरी दे दी थी.

लेकिन मंत्रिमंडलीय समिति ने सिफ़ारिश की थी कि जाति आधारित जनगणना बायोमिट्रिक जनगणना का दौर शुरु होने के साथ ही शुरु होगी.

चिदंबरम ने यह जानकारी देते हुए कहा, "यह विचार किया गया कि जाति जनगणना इस तरह से की जाए कि नियमित जनगणना के आंकड़ों की विश्वसनीयता बनी रहे. इसलिए जाति आधारित जनगणना अलग से करना का फ़ैसला किया गया."

मंत्रिमंडल के फ़ैसले के अनुसार अब जनगणना के दो अलग-अलग आँकड़े मिलेंगे. एक तो हर दशक में होने वाले सामान्य जनगणना के और दूसरा 2011 में होने वाली जाति जनगणना के.

अधिकारियों का कहना है कि जो लोग अपनी जाति के बारे में जानकारी नहीं देना चाहते, उन्हें इसकी छूट होगी.

चिंदबरम ने बताया कि फ़िलहाल यह अनुमान नहीं लगाया गया है कि जाति जनगणना में कितना खर्च आएगा. उनका कहना था कि वित्तमंत्री के नेतृत्व में यह आकलन बाद में किया जाएगा.

उनका कहना था कि इसमें खर्च तो ज़रुर आएगा क्योंकि यह एक अलग प्रक्रिया है.

हर दस साल में होने वाली जनगणना पहली अप्रैल से शुरु हुई है. विपक्षी दलों ने इस जनगणना में जाति आधारित जनगणना को शामिल किए जाने की मांग की थी और इसे लगभग सभी विपक्षी दलों का समर्थन था.

कांग्रेस के भीतर इसे लेकर मतभेद था लेकिन बाद में मंत्रिमंडलीय समिति ने इसे मंज़ूरी दे दी थी.

संबंधित समाचार