सबको मिलेगी पहचान: निलेकनी

नंदन निलेकनी
Image caption नंदन निलेकनी भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के अध्यक्ष हैं

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के अध्यक्ष नंदन निलेकनी बंजारों और यायावर आदिवासी जैसे भारतीयों को भी विशिष्ट पहचान पत्र यानि यूनीक आईडी (यूआईडी) दिलाना चाहते हैं जिनके पास अपनी पहचान बताने के लिए कोई सरकारी कागज़ नहीं है.

बीबीसी को दिए एक साक्षात्कार में नंदन निलेकनी ने बताया कि विशिष्ट पहचान प्राधिकरण तीन तरह से लोगों का सत्यापन करेगा.

इसके लिए जानकारी हासिल करने के पहले तरीके में राशन कार्ड और रोज़गार कार्ड की तरह के सरकारी कागज़ काम आएंगे.

सत्यापन हासिल करने के लिए जानकारी हासिल करने के दूसरे तरीके में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर का भी सहारा लिया जाएगा.

सत्यापन के तीसरे तरीके में उन लोगों के लिए काम होगा जिनके पास इनमें से कोई भी कागज़ नहीं है.

उनका कार्ड किसी ऐसे आदमी की गवाही पर बन जाएगा जो कहे कि वो उन्हें अच्छे से जानता है.

निलेकनी कहते हैं कि इस पहचान पत्र के बाद भारत के एक हिस्से के आदमी की पहचान का सत्यापन भारत के दूसरे हिस्से में भी आसानी से हो जाएगा.

उनका कहना है कि "ये मोबाइल पहचान पत्र होगा. भारत के किसी भी कोने से किसी भी आदमी की पहचान तय करने के लिए महज़ फ़ोन कर के उसके कार्ड का क्रमांक बताना होगा और उसका सत्यापन हो जाएगा".

नंदन निलेकनी के साथ ख़ास बातचीत

मतदाता पहचान पत्र से अलग

Image caption ऐसा होगा विशिष्ट पहचान पत्र यानि यूनीक आईडी

निलेकनी का दावा है कि चुनाव आयोग के मतदाता पहचान पत्र से अलग इस पहचान पत्र के लिए एक ही सॉफ्टवेयर इस्तेमाल होगा.

इसके लिए एक ही प्रक्रिया इस्तेमाल होगी और हर चीज़ की दो बार जाँच होगी.

अगले कुछ हफ़्ते में ये कार्ड लॉन्च किया जाएगा.

इसके लिए तैयार निलेकनी का कहना है, " हमारा ध्येय है कि हम अगले चार सालों में साठ करोड़ लोगों को ये कार्ड जारी कर दें."

पर वो ये कहते हैं कि उसके आगे का काम कठिन होगा क्योंकि जैसे जैसे दूर दराज़ के हिस्सों में उनके लोग जाएँगे, उन्हें नई कठिनाइयों का सामना करना होगा.

संबंधित समाचार