कश्मीर: पार्टियों की अलग-अलग राय

कश्मीर पर सर्वदलीय बैठक
Image caption बैठक के बाद प्रमुख दलों ने अलग-अलग तौर पर संवाददाताओं से बात की और अपना रुख सामने रखा.

भारत प्रशासित कश्मीर में बिगड़ते हालात को लेकर बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में कश्मीर के लिए एकमत से कोई हल निकल कर नहीं आया है.

फिलहाल तय किया गया है कि एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल कश्मीर की यात्रा करेगा और ज़मीनी हालात का जायज़ा लेगा.

सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल जाएगा कश्मीर

बैठक के बाद प्रमुख दलों ने अलग-अलग तौर पर संवाददाताओं से बात की और अपना रुख सामने रखा.

स्वायतत्ता के विरुद्ध भाजपा

भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने प्रेस वार्ता के ज़रिए कहा कि भारत प्रशासित कश्मीर की समस्या को सुलझाने के लिए संविधान के दायरे में जो भी हल सुझाए जाएंगे भाजपा उसके पक्ष में होगी.

उन्होंने कहा, ''भाजपा स्वायतत्ता की मांग का विरोध करती रही है. संविधान के दायरे में जो भी बातचीत की जाएगी हम उसमें सहयोग करेंगे. जो सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल कश्मीर की यात्रा करेगा भाजपा का ओर से कुछ सदस्य उसमें शामिल होंगे.''

सशस्त्र बल विशेषाधिकार क़ानून (एएफ़स्पा) को लेकर प्रसाद ने कहा, ''भारतीय सेना के जवानों ने कश्मीर में अलगाववाद से लड़ने और कश्मीर को सुरक्षित रखने के लिए अपना बलिदान दिया है, सरकार की ओर से ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए जिससे जवानों पर दबाव बढ़े.''

‘बिना शर्त’ बातचीत: पी़डीपी

बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान भारत प्रशासित कश्मीर में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता महबूबा मुफ़्ती ने कहा कि हालात को काबू में लाने के लिए ज़रूरी है कि इस समस्या को मानवीय आधार पर देखा जाए और सभी पक्ष ‘बिना किसी शर्त’ बातचीत के लिए तैयार हों.

महबूबा मुफ़्ती ने कहा, ''हम सिर्फ प्रधानमंत्री से ही नहीं बल्कि आम लोगों और अलगाववादियों से भी यह कहना चाहते हैं कि वो बिना किसी शर्त बातचीत के लिए तैयार हों.''

उन्होंने कहा, ''जिन नौजवानों को घाटी में गिरफ़्तार किया गया है उन्हें रिहा किया जाना चाहिए और सुबह से शाम तक कर्फ़्यू की जो स्थिती कश्मीर में बनी हुई है उसे खत्म किया जाना चाहिए.''

सशस्त्र बल विशेषाधिकार क़ानून (एएफ़स्पा) को हटाने के बारे में पूछे जाने पर महबूबा मुफ़्ती ने कहा कि पीडीपी ने ही पहली बार इस कानून को हटाए जाने की मांग की थी.

उन्होंने कहा, ''हमने अपनी बात सभी दलों के सामने रख दी है. हम कश्मीर के लिए कोई दिखावटी हल नहीं चाहते. कश्मीर की समस्या का जो भी हल निकाला जाए उससे ज़मीनी तौर पर हालात बदलने चाहिए.''

बैठक से संतुष्ट: एनसी

भारत प्रशासित कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला सर्वदलीय बैठक में शामिल नहीं हुए. उनकी जगह बैठक में हिस्सा लेने आए नेशनल कांफ्रेंस के नेता फारुख अब्दुल्ला ने कहा कि प्रधानमंत्री कश्मीर को लेकर उमर अब्दुल्ला के शासन और उनके फैसलों से खुश हैं.

उन्होंने कहा, ''एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल कश्मीर जाएगा और ज़मीनी हालात का जायज़ा लेगा. यह दल अलगाववादियों सहित उन सभी दलों से बात करेगा जो इस मसले से जुड़े हैं.''

Image caption भारत प्रशासित कश्मीर में पिछले तीन महीने से हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं.

इस बीच बैठक की शुरुआत में सभी दलों को संबोधित करते हुए मनमोहन सिंह ने शांति कायम करने की अपील को दोहराते हुए कहा था कि सरकार किसी के साथ भी बातचीत के लिए तैयार हैं बशर्ते वह पक्ष हिंसा को त्यागे.

उन्होंने कहा, "ये सही है कि कई प्रदर्शन अपने आप जनता की भावनाओं के कारण हुए हैं लेकिन इस बात का खंडन नहीं किया जा सकता कि कुछ प्रदर्शन सोच-समझकर योजनाबद्ध तरीके से हुए हैं. सार्थक चर्चा तभी हो सकती है जब शांति का माहौल कायम हो."

'दूसरा विभाजन'

इस बीच जम्मू-कश्मीर के कश्मीरी पंडितों, गुज्जरों और लदाखी बौध जैसे अल्पसंख्यक समुदायों के प्रतिनिधियों का कहना है कि कश्मीर के मसले के हल के लिए प्रधानमंत्री द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक का कोई महत्व नहीं है क्योंकि उसमें सिर्फ अलगाववादियों की मांगों की चर्चा की गई, जबकि अल्पसंख्यकों के दृष्टिकोण के प्रति सरकार उदासीन है.

दिल्ली में बीबीसी संवाददाता शालू यादव से बातचीत के दौरान कश्मीरी पंडितों के संगठन 'पनुन कश्मीर' के नेता अग्निशेखर ने कहा, '' हमें इस बात का दुख है कि प्रधानमंत्री कश्मीरी पंडितों की आवाज़ों को अब तक नकारते रहे हैं. ऐसा करना देश के लिए घातक साबित होगा. मौजूदा स्थिति को देखते हुए मुझे लगता है कि भारत में दूसरे विभाजन की स्थिति बन रही है.''

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