डेंगू पर आंकड़ों का खेल

  • 17 सितंबर 2010
डेंगू मच्छर
Image caption सरकार का डेंगू टेस्ट मच्छर के काटने के कम से कम पांच दिन बाद ही हो सकता है.

दिल्ली सरकार का कहना है कि दिल्ली में डेंगू के मरीज़ों की संख्या लगभग 1900 है, लेकिन निजी और सरकारी अस्पतालों की पड़ताल ये साबित करती है कि ये आंकड़ा 5000 तक पहुंच गया है.

दिल्ली के अस्पतालों में उन मरीज़ों की बड़ी संख्या देखी जा सकती है जो या तो बुख़ार से पीड़ित हैं या डेंगू का डर उन्हें अस्पताल खींच लाया है.

टेस्ट कराने पर जिन मरीज़ों की रिपोर्ट पॉज़िटिव आती है वो सरकारी अस्पतालों में एक बेड पर तीन और मरीज़ों के साथ पड़े मिलते हैं. अस्पताल इस बात से बेफिक्र दिखते हैं कि इस लापरवाही से बीमारी और भी ज्यादा गंभीर हो सकती है.

अस्पतालों में मरीज़ों की भीड़ के बावजूद सरकार कहती है कि डेंगू के मरीज़ दिल्ली में लगभग 1900 ही हैं. मरीज़ों की तादाद देखकर सरकार का ये आंकड़ा 1900 का ये आंकड़ा गले से नीचे नहीं उतरता.

हमने दिल्ली के निजी अस्पतालों और डेंगू के टेस्ट करने वाले परीक्षण लैब जाकर मामले की पड़ताल करने का फैसला किया.

हमें पता चला कि यहां पर कई ऐसे मरीज़ हैं जिन्हें सरकार ने अपने आंकड़ों में शामिल ही नहीं किया है.

असली संख्या

सबसे पहले हम पहुंचे दिल्ली के प्रतिष्ठित डॉक्टर लाल पाथ लैब. दिल्ली में इनकी कुल 12 लैब हैं. लैब के अध्यक्ष डॉक्टर अर्विंद लाल ने बताया कि उनके टेस्ट में अब तक 2081 लोगों को डेंगू से संक्रमित पाया गया है.

Image caption डॉक्टर अर्विंद लाल ने कहा, "हमारे यहां जुलाई से लेकर 7 सितंबर तक कुल 6400 मरीज़ आ चुके हैं जिनमें से 2081 में डेंगू पाया गया."

डॉक्टर अर्विंद लाल ने कहा, " हमारे यहां जुलाई से लेकर 7 सितंबर तक कुल 6400 मरीज़ आ चुके हैं जिनमें से 2081 में डेंगू पाया गया. यानी आप कह सकते हैं कि 33 प्रतिशत लोगों को डेगू था."

इस लैब का अकेला आंकड़ा सरकार के तथाकथित आंकड़ों से भी ज़्यादा था. जब एक लैब में ही डेंगू के इतने मरीज़ हैं तो बाक़ी लैब या निजी अस्पतालों का आलम क्या होगा.

इसके बाद हम पहुंचे डॉक्टर डैंग की लैब में. लैब में अब तक लगभग 1200 मरीज़ डेंगू से पीड़ित पाए गए हैं.

लैब के अध्यक्ष डॉक्टर नवीन डैंग ने कहा, " हमारे यहां अब तक लगभग 1200 मरीज़ डेंगू के लिए पॉज़िटिव टेस्ट कर चुके हैं."

हमने मैक्स अस्पताल जाकर भी डेंगू की जांच और मरीज़ों की संख्या के बारे में पड़ताल की.

मैक्स अस्पताल के 'इंस्टीट्यूट ऑफ इंटर्नल मेडिसिन्स' के निदेशक डॉक्टर संदीप बुद्धीराजा ने हमें बताया, "हमारे यहां जनवरी 2010 से लेकर अब तक डेंगू के मरीज़ों की संख्या 1740 हो चुकी है जिनमें 95 प्रतिशत मरीज़ जुलाई के आख़िर में आने शुरु हुए थे."

डॉक्टर लाल और डॉक्टर डैंग की पाथ लैब के आंकड़ों को मिला लिया जाए तो 3000 से भी ज़्यादा मरीज़ सिर्फ दो लैब से ही हो गए थे. ये आंकड़ा अपने आप में ये सवाल खड़ा करता है कि निजी अस्पतालों के डेंगू मरीज़ों को सरकार अपने आंकड़ों में शामिल क्यों नहीं करती.

टेस्ट में फ़र्क

दिल्ली की स्वास्थ्य मंत्री किरण वालिया का कहा, "निजी लैब एन एस-1 एंटीजेन टेस्ट कर रहे हैं जिसे अभी तक केंद्र सरकार नहीं मान रही है. नगरपालिका का एक आधार है उसी के मुताबिक़ ये आंकड़े बताए गए हैं. ये सिस्टम पूरी तरह से पुख्ता नहीं है बहरहाल मैं ये भी मानती हूं कि डेंगू इस बार ज़्यादा है."

सरकारी और निजी अस्पतालों में डेंगू की जांच के तरीक़ों को लेकर मतभेद है.

Image caption निजी लैब में डेंगू के मरीज़ों का एन एस-1 एंटीजेन टेस्ट किया जाता है जिसका परिणाम मच्छर काटने के पहले दिन ही आ जाता है.

सरकारी अस्पतालों में आज भी डेंगू के टेस्ट तीन साल पुराने तरीक़े से किए जाते हैं.

इस टेस्ट को कहते हैं IgG-IgM टेस्ट या फिर सिरोलॉजी टेस्ट जबकि निजी अस्पताल और लैब नया एन एस-1 एंटीजेन टेस्ट करते हैं जो सरकार के टेस्ट से महंगा भी है. दोनों ही टेस्ट मान्यता प्राप्त हैं.

फर्क सिर्फ़ इतना है कि महंगे एन एस -1 एंटीजेन टेस्ट में डेंगू के मच्छर के काटने पर पहले दिन ही नतीजा पता चल जाता है. लेकिन सरकार की तरफ से किया जा रहा IgG-IgM टेस्ट डेंगू के लक्षण दिखने के कम से कम पांच दिन बाद ही किया जा सकता है.

आरोप-प्रत्यारोप

डॉक्टर नवीन डैंग का कहना है, "सरकार का तरीक़ा 20वीं सदी का तरीक़ा है जबकि हमारा 21वीं सदी का. कॉमनवेल्थ खेलों का भी एक कारण हो सकता है कि सरकार नहीं चाहती कि निजी लैब के आंकड़ों को सही माना जाए. लेकिन ये सच है कि एन एस-1 एंटीजेन टेस्ट लगभग 100 फ़ीसदी सटीक बैठता है."

इस बीच दिल्ली के महापौर पृथ्वी राज साहनी का आरोप है कि निजी अस्पताल पैसे एंठने के लिए बुख़ार होने पर भी डेंगू का टेस्ट करते हैं.

सरकार और निजी अस्पतालों में ये मतभेद ये आरोप-प्रत्यारोप चलते रहेंगे, लेकिन सवाल ये भी है कि आंकड़ों के खेल की बजाय क्या सरकार डेंगू के बढ़ते मामलों के लिए एहतियाती कदम उठा रही है.

जो लोग ज़्यादा पैसा ख़र्च कर डेंगू का मान्यता प्राप्त टेस्ट करवा रहे हैं और उन्हें पॉज़िटिव पाया जा रहा है, क्या वो सरकारी आंकड़ों में शामिल नहीं होने चाहिए.

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