टिहरी बाँध से बाढ़ की स्थिति

टिहरी
Image caption टिहरी बाँध में जलभराव बढ़ने से कई गाँव डूबने लगे हैं.

एशिया के सबसे ऊंचे टिहरी बांध की झील में 825 मीटर ऊंचाई तक पानी भरने के कारण आसपास के कई गाँवों में बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई है.

घर, मकान डूब रहे हैं और खेत और गांव कट-कट कर बाँध में समा रहे हैं.

राज्य सरकार ने इसपर कड़ी आपत्ति दर्ज करते हुए टीएचडीसी (टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन) को नोटिस भेजा है और प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिये 450 करोड़ रुपये की मांग की है.

टिहरी बांध में सामान्यत: 820 मीटर ऊंचाई तक पानी रहता है.

अत्यधिक बारिश का हवाला देकर टीएचडीसी ने झील में जलभराव बढ़ाना शुरू कर दिया जो अब 825 मीटर की ऊंचाई तक पंहुच गया है.

इससे झील का दायरा भी बढ़कर 40 वर्ग किलोमीटर के विशाल क्षेत्र में फैल रहा है और इसने उत्तरकाशी और भिलंगना घाटी के कई गाँवों और खेत-खलिहानों को डूबोना शुरू कर दिया है.

दिचली गमरी क्षेत्र के 50 गाँवों का संपर्क भी पूरी तरह कट गया है. पूरे इलाक़े में ज़मीन खिसकने और भू-धँसाव की घटनाएँ हो रही हैं.

राज्य-सरकार की नोटिस

टिहरी बांध विस्थापितों के बीच 15 से भी अधिक सालों से काम कर रहे सामाजिक कार्यकर्त्ता महीपाल सिंह नेगी कहते हैं, “टीएचडीसी के अधिकारी जल आयोग के मानकों और पुनर्वास क़ानून की धज्जियाँ उड़ा रहे हैं और ये मानव निर्मित्त बाढ़ है.”

हाँलाकि टीएचडीसी के मुख्य महाप्रबंधक जी एम शाह का कहना है, “अत्यधिक बारिश पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं है और जो भी किया जा रहा है वो नियमों के तहत है.”

इस बीच मुख्यमंत्री निशंक ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के बाद इस स्थिति के लिए टीएचडीसी को ज़िम्मेदार ठहराया और पुनर्वास विभाग के दो अधिकारियों को बिना प्रदेश शासन को संज्ञान में लिए टीएचडीसी को जलभराव की अनुमति देने के लिए उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई किए जाने की बात कही है.

Image caption टिहरी बाँध में पानी के बढ़ते स्तर को मानव जनित बताया जा रहा है

सरकार ने टीएचडीसी को नोटिस दिया है कि अगर तत्काल इसका समाधान नहीं किया गया और प्रभावित लोगों के लिए 450 करोड़ रूपए नहीं दिए गए तो झील में और पानी भरने की इजाज़त नहीं दी जाएगी.

जलभराव के मानक और सच्चाई

अगर बाँध में जलभराव के मानकों और सर्वोच्च अदालत में टीएडीसी द्वारा दायर शपथपत्र को देखें तो 820 मीटर की ऊंचाई के बाद झील में बहुत सावधानी और नियंत्रित ढंग से जलभराव किया जाना चाहिए.

इसके मुताबिक 48 घंटे में अधिक से अधिक 15 सेंटीमीटर पानी भरा जा सकता है. लेकिन टिहरी बाँध में इस बीच हर दिन इससे दोगुनी से भी अधिक गति और मात्रा में पानी भरा गया .

दूसरा ये भी कि बाँध की सुरक्षा के लिहाज़ से बाँध में पानी को 822.5 मीटर की ऊँचाई पर कुछ दिनों के लिए अस्थाई रूप से रोककर रखा जाना चाहिए था लेकिन वहाँ इसका ध्यान न रखकर 822 मीटर के बाद भी निरंतर जलभराव किया गया.

तीसरा ये भी कि सिर्फ 820 मीटर तक ही अनियंत्रित जलभराव किया जा सकता है लेकिन इसकी परवाह न करते हुए हज़ारों घन मीटर पानी भर दिया गया और व्यापक रूप से भागीरथी और भिलंगना की घाटियों में रह रहे लोगों का जन-जीवन ख़तरे में डाला गया.

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