इराक़ियों को मिला जयपुर फ़ुट का सहारा

जयपुर फ़ुट निर्माण प्रक्रिया को समझने इराक़ से जयपुर आए कार्यकर्ता

हिंसा और जंग से जर्जर हो चले इराक़ में 'जयपुर फ़ुट' अपाहिज ज़िंदगियों के लिए बड़ा सहारा लेकर अवतरित हुआ है.

इराक़ के एक ग़ैर सरकारी संगठन ने अपने चार सदस्यों को जयपुर फ़ुट बनाने की तकनीक सीखने के लिए जयपुर भेजा है.

ये लोग जयपुर में कोई तीन माह रहेंगे और भगवन महावीर विकलांग सहायता समिति के सहयोग से जयपुर फ़ुट बनाने की तकनीक सीखेंगे. इसके लिए भारत सरकर ने भी मदद की है.

इससे पहले ये समिति इस साल इराक़ की राजधानी बग़दाद में शिविर लगा कर एक हज़ार विकलांग लोगों को जयपुर फ़ुट की सहायता से चलने में सक्षम बना चुकी है.

इस दल के नेता अहमद तौफ़ीक़ कहते है "जयुपर फ़ुट इराक़ में अब जाना माना नाम है. हम ये तकनीक सीख कर वहां अपाहिज लोगों को जयपुर फ़ुट के ज़रिए चलने का सहारा देना चाहते हैं. हमारा इरादा हर साल कोई पांच हज़ार लोगों को जयपुर फ़ुट के सहारे अपने पैरों पर खड़ा करना है."

समिति के प्रमुख डीआर मेहता ने बीबीसी को बताया कि इराक़ में हिंसा ने कई हज़ार लोगों के पैर छीन लिए हैं. उन्होंने कहा, ''हमारे पास ठीक आंकड़े नहीं है कि कितने लोग अपाहिज हैं. मगर एक अनुमान है कि कोई एक लाख लोग विकलांग है.''

डीआर मेहता ने बताया, ''अभी इराक़ में हर साल 800 पैर लगाने की व्यवस्था है, मगर चलाबी संस्था के लोग यहाँ से तकनीक सीख कर काम शुरू करेंगे तो उम्मीद है हर साल पांच हज़ार लोग जयपुर फ़ुट से चल सकेंगे.''

बड़ा हौसला

ये इराक़ी नागरिक जब तीन माह तक काम सीख कर बगदाद में केंद्र स्थापित करेंगे तो ये उनके काम को व्यवस्थित करने में सहायता के लिए समिति के दो तकनीशियन भी बग़दाद भेजे जाएंगे.

इराक़ी सामाजिक कार्यकर्ता अहमद कहते है जयपुर फ़ुट ने इराक में अपाहिज लोगो को बड़ा हौसला दिया है.

उन्होंने कहा, ''ये सस्ता है, टिकाऊ है, इसमें ज़मीन पर बैठ सकते हैं. ये हुबहू असली पैर जैसा ही है. हमारे शिविर में अपाहिज दूसरों की मदद से आए. मगर जब लौटे तो किसी की मदद की ज़रूरत उन्हें नहीं पड़ी क्योंकि जयपुर फ़ुट ने उनके अपाहिज जीवन को चाल दे दी.''

अहमद कहते है जयुपर फ़ुट का अनुभव इतना अच्छा रहा कि लोग बेसब्री से इसका इंतजार कर रहे हैं.

समिति के प्रमुख मेहता कहते हैं जयुपर फ़ुट गुणवत्ता में किसी भी कृत्रिम पैर के मुक़ाबले ज़्यादा बेहतर है.

उनका कहना है, ''जयपुर फ़ुट की लागत हमारे यहाँ 45 डॉलर आती है जबकि अमरीका में यही 12000 डॉलर में बनता है."

ये समिति हर साल कोई 20 हज़ार लोगो को जयपुर फ़ुट का सहारा देती है. जयपुर का ये संगठन अब तक कोई चार लाख लोगो को जयपुर फ़ुट लगा कर उनकी ज़िंदगी में चलने का रंग भर चुका है.

जयपुर फ़ुट दुनिया के हर हिस्से में पहुंचा है. इसमें अफ़ग़ानिस्तान, लेबनान, श्रीलंका, कोलम्बिया, पाकिस्तान और सेनेगल जैसे देश भी शामिल हैं.

इस संस्था के लोग ऐसे इलाक़ों में पहुंचे है जहाँ हिंसा और बम धमाको ने बड़ी तादाद में अपाहिज लोगों को उन्हें उनके भाग्य पर छोड़ दिया था. अब ये संस्था फ़लस्तीन में एक शिविर लगाने पर विचार कर रही है.

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