कश्मीर: हिंसा में तीन और मरे

  • 18 सितंबर 2010
जनाज़ा
Image caption भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस और सीआरपीएफ ने गोली चलाई.

भारत प्रशासित कश्मीर में हिंसा के दौरान एक प्रदर्शनकारी की शवयात्र पर की गई पुलिस फायरिंग में तीन और लोगों की मौत हो गई है.

एक प्रदर्शनकारी की शवयात्रा के दौरान अनंतनाग में भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस और सीआरपीएफ ने गोली चलाई. इस गोलीबारी में तीन लोगों की मौत हो गई.

इस बीच भारतीय कश्मीर के अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी ने सैनिक कैंपों के बाहर विरोध प्रदर्शन की अपील वापस ले ली है.

गिलानी ने बीबीसी को बताया कि लोगों से कहा जाएगा कि वो ज़िला और तहसील मुख्यालय में जमा हों और कश्मीर से सेना हटाने की मांग करें.

उनका कहना था कि भारतीय सेना को भी ''अन्य ज़रियों से'' एक चिठ्ठी भेजी जाएगी.

बृहस्पतिवार को गिलानी ने कहा था कि लोग सैनिक कैंपों की ओर मार्च करेंगे लेकिन थोड़ी दूरी पर रूक जाएंगे. उन्होंने कहा था कि दो या तीन लोग हर कैंप के बाहर जाकर एक चिठ्ठी सौंप देंगे.

लेकिन अब उनका कहना है कि कैंपों की ओर कोई प्रदर्शन नहीं होंगे.

उनका कहना था, "सेना हमारी अपील से घबराई हुई थी और डर था कि वो लोगों पर गोलियां चला सकती है."

सेना के प्रवक्ता ने कहा था कि हूर्रियत की ओर से प्रदर्शन का एलान लोगों को भड़काने की कोशिश है और इसमें सेना को घसीटने का प्रयास है.

इस बीच श्रीनगर में चार घंटे के लिए कर्फ़्यू में ढील दी गई है.

मौत का सिलसिला

Image caption गिलानी ने सैनिक कैंपों के बाहर प्रदर्शन की अपील वापस ले ली है.

राज्य के 16 शहरों में कर्फ़्यू लगा हुआ है और जनजीवन ठप्प है.

श्रीनगर से 55 किलोमीटर दूर अनंतनाग शहर में निकली शवयात्रा मारूफ़ अहमद नाथ नामक किशोर की थी जो पिछले सोमवार को नदी में डूब गया था और उसका शव शनिवार को बरामद हुआ.

स्थानीय लोगों का कहना है कि शवयात्रा के दौरान पुलिस ने बेवजह गोली चलाई.

पुलिस का कहना है कि उन्हें गोली चलानी पड़ी जब गुस्साई भीड़ ने एक नेता के घर पर हमला किया. उनका कहना है कि कुछ स्थानीय लोगों ने सुरक्षाबलों के हथियार छीनने की भी कोशिश की.

लेकिन कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस सड़क से शवयात्रा निकल रही थी वहां किसी नेता का घर नहीं है.

इसके अलावा पिछले मंगलवार को पुलिस गोलीबारी में घयाल एक युवक फ़याज अहमद की शुक्रवार रात अस्पताल में मौत हो गई. फ़याज़ अहमद के सर में गोली लगी थी.

वहीं शोपियां के पिंजोरा क्षेत्र में एक पुलिसकर्मी के घर को जला दिया गया है.

सामानों की कमी

अबतक हुई हिंसा में लगभग सौ लोग मारे जा चुके हैं और एक पुलिसकर्मी की भी मौत हुई है.

श्रीनगर में आज सातवें दिन कर्फ़्यू में चार घंटों की ढील दी गई. वहां अब ज़रूरत की चीज़ों की भी कमी महसूस होने लगी है.

कुछ जगह तो दूध की सप्लाई को भी शहर के अंदर नहीं जाने दिया गया.

पुलिस ने कुछ नंबर जारी किए हैं जिसपर स्थानीय एसएचओ को फ़ोन करके किसी इमरजेंसी से अवगत कराया जा सकता है.

सरकार फ़िलहाल सोमवार को केंद्र से आनेवाले सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की तैयारी में लगी हुई है लेकिन लोगों को इस यात्रा से बहुत ज़्यादा उम्मीदें नहीं हैं.

वहीं पर्यवेक्षकों का कहना है कि इसबार के विरोध प्रदर्शनों से नौजवानों को उम्मीद है कि स्थिति बदलेगी और ये बाद अलगाववादी हूरियत नेतृत्व के लिए भी चिंता का विषय है.

पर्यवेक्षकों का कहना है कि यदि अलगाववादी नेतृत्व असफल रहता है या नौजवानों की उम्मीद से अलग हट कर बयान देता है तो उन्हें डर है कि नौजवान उनके नेतृत्व से अलग हट जाएंगे.

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