अलगाववादी नेताओं से मिला प्रतिनिधिमंडल

  • 20 सितंबर 2010
सैयद अली शाह गिलानी
Image caption गिलानी ने पहले प्रतिनिधिमंडल से मिलने से इनकार कर दिया था

भारत प्रशासित कश्मीर की यात्रा पर गए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ने घाटी के अलगाववादी नेताओं से अलग-अलग भेंट की है. पैंतीस सदस्यों के इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व गृह मंत्री पी चिदंबरम कर रहे हैं.

अलगाववादी नेताओं ने पहले इस प्रतिनिधिमंडल से मिलने से इनकार किया था लेकिन सोमवार दोपहर बाद सीपीएम नेता सीताराम येचुरी की अध्यक्षता में पांच सदस्यों का एक दल बुज़ुर्ग पृथकतावादी नेता सैयद अली शाह गिलानी के घर गया और उनके साथ आधे घंटे तक मुलाक़ात की.

गिलानी ने अपना पक्ष दोहराया कि कश्मीर समस्या पर सार्थक बातचीत उसी सूरत में शुरु की जा सकती है जब भारत सरकार कश्मीर को एक अंतरराष्ट्रीय विवाद के रुप में स्वीकार करे.

उन्होंने बीबीसी को बताया कि दिल्ली से आए नेताओं ने उन्हें आश्वासन दिलाया कि वे उनके पांच सूत्रीय फ़ार्मूले पर ग़ौर करेंगे और वे भारत सरकार को भी इस फ़ॉर्मूले पर ग़ौर करने के लिए कहेंगे.

गिलानी का पाँच सूत्रीय फ़ार्मूला

गिलानी के पांच सूत्रीय फ़ॉर्मूले में कश्मीर से सेना की वापसी, राजनीतिक क़ैदियों की रिहाई और सेना को प्राप्त विशेष अधिकार वापस लेने की मांग शामिल है.

गिलानी ने कहा कि वे इस प्रतिनिधिमंडल की कश्मीर यात्रा के लाभदायक होने या न होने के बारे में उस समय कोई राय बनाएंगें जब ये प्रतिनिधिमंडल केंद्र सरकार को अपनी सिफ़ारिशें पेश करेगा.

मीरवाइज़ से मुलाक़ात

Image caption मीर वाइज़ उमरफ़ारुक़ और यासीन मलिक ने संयुक्त रुप से एक ज्ञापन सौंपा है

दिल्ली से आए राजनेताओं के प्रतिनिधिमंडल के कुछ सदस्य बाद में मीरवाइज़ उमर फ़ारुक़ से भी मिलने उनके निवास स्थान पहुंचे.

मीरवाइज़ उमर फ़ारुक़ ने आज़ादी की मांग की लेकिन प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने स्पष्ट कर दिया कि वे आज़ादी की मांग को छोड़ किसी भी मुद्दे पर बात करने के लिए तैयार हैं.

इस पर मीरवाइज़ का कहना था कि कश्मीर में आजा़दी को छोड़कर कोई दूसरा मुद्दा है ही नहीं.

प्रतिनिधिमंडल के कुछ सदस्य बाद में जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ़्रंट (जेकेएलएफ़) के प्रमुख यासीन मलिक से भी मिलने गए.

इससे पहले मीरवाइज़ उमर फ़ारुक़ और यासीन मलिक ने प्रतिनिधिमंडल के नाम एक संयुक्त ज्ञापन भेजा था. इस ज्ञापन में प्रस्ताव रखा गया था कि भारत सरकार एक कश्मीर समिति का गठन करे जिसमें भारत की सभी राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधि शामिल हों.

ज्ञापन में आगे कहा गया है कि ये कमेटी कश्मीरी प्रतिनिधियों के साथ वार्ता के ज़रिए कश्मीर समस्या का एक ऐसा समाधान तलाश करें जो तीनों पक्षों यानी भारत, पाकिस्तान और कश्मीरी अवाम को स्वीकार हो.

अन्य मुलाक़ातें

सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ने श्रीनगर पहुंचने के बाद डल झील के किनारे स्थित शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कंवेंशन परिसर में कश्मीर की भारत समर्थक राजनीतिक पार्टियों के नुमाइंदों के साथ अलग-अलग बात की.

सत्तारूढ़ गठबंधन का नेतृत्व कर रही पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस का जो दल इस प्रतिनिधिमंडल से मिला, उसका नेतृत्व वित्तमंत्री अब्दुल रहीम रादर ने किया. उनका कहना है कि उन्होंने कश्मीर में 1953 से पहले लागू स्वायत्ता को बहाल करने की मांग की है. उनका कहना है कि कश्मीर समस्या का यही सबसे अच्छा हल होगा.

दूसरी ओर जम्मू कश्मीर की मुख्य विपक्षी पार्टी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की नेता महबूबा मुफ़्ती ने ख़ुद को इस प्रतिनिधि मंडल से दूर रखा. लेकिन उन्होंने अपनी पार्टी के 15 लोगों के एक प्रतिनिधिमंडल को दिल्ली से आए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल से मिलने के लिए भेजा.

पीडीपी के नेताओं ने मांग की है कि केंद्र सरकार को कश्मीर समस्या को सुलझाने के लिए 'आउट ऑफ़ बॉक्स' हल तलाश करना चाहिए.

इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने स्थानीय व्यापारियों के नुमाइंदों से भी बात की.

एक वरिष्ठ उद्योगपति शकील कलंदर ने पत्रकारों को बताया, “हमने अपने किसी व्यापारिक नुकसान की बात नहीं की, किसी पैकेज की मांग नहीं की. हमने मानव अधिकारों के हनन का मामला उठाया और प्रतिनिधिमंडल को ज़ोर देकर बताया कि कश्मीर समस्या का स्थाई समाधान निकाला जाना चाहिए.”

उल्लेखनीय है कि सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल एक ऐसे समय कश्मीर की यात्रा पर आया है जब घाटी की लगभग पूरी आबादी पिछले नौ दिनों से लगातार कर्फ़्यू झेल रही है.

वहाँ पिछले तीन महीनों में कभी अलगाववादियों के बंद की वजह से तो कभी कर्फ़्यू की वजह से जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा है.

इस बीच हुए हिंसक प्रदर्शनों और उसके बाद सुरक्षा बलों की गोली से सौ से भी अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और कई अन्य घायल हुए हैं. मारे गए ज़्यादातर नवयुवक हैं.

इसी बीच कई लोगों ने ये सवाल उठाया है कि जब ये प्रतिनिधिमंडल आम कश्मीरियों से मिल ही नहीं सका तो इसके आने फ़ायदा क्या हुआ.

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