अयोध्या: फ़ैसला टलने से समस्या

अयोध्या-बाबरी मस्जिद
Image caption छह दिसंबर को कार सेवकों ने बाबरी मस्जिद ध्वस्त कर दिया था

दशकों से चल रहे अयोध्या विवाद से जुड़े मुख्य मामले की सुनवाई करने वाली तीन जजों की विशेष पीठ के एक जज न्यायमूर्ति धर्मवीर शर्मा पहली अक्तूबर को रिटायर हो रहे हैं.

अदालत ने फ़ैसले की तारीख़ 24 सितंबर तय कर दी है. मुक़दमे के एक पक्षकार ने मामले को आपसी सहमति से तय करने के लिए और समय माँगा था.

हाईकोर्ट ने इस संबंध में मुक़दमे के प्रतिवादी रमेश चंद्र त्रिपाठी की याचिका को शरारतपूर्ण बताते हुए रद्द कर दिया था और उन पर 50 हज़ार रुपए का जुर्माना लगाया था. लेकिन त्रिपाठी ने इस बिंदु पर सुप्रीम कोर्ट में अपील की है.

जानकारों का कहना है कि ऐसे में अगर सरकार चाहे तो हाईकोर्ट के किसी रिटायर होने वाले जज को एक साल के लिए दोबारा अस्थायी पुनर्नियुक्ति दी जा सकती है, लेकिन इसकी पहल स्वयं न्यायपालिका को करनी होगी.

इससे पहले लखनऊ हाईकोर्ट की अयोध्या पीठ के ही एक जज जस्टिस ओपी श्रीवास्तव को एक साल की अस्थायी पुनर्नियुक्ति दी गई थी. लेकिन उनके बढ़े हुए कार्यकाल में भी फ़ैसला नहीं हो पाया.

इससे भी पहले कानपुर में पीएसी विद्रोह की सुनवाई करने वाली पीठ के जज जस्टिस उषाकांत वर्मा को रिटायर होने के बाद एक साल की अस्थायी पुनर्नियुक्ति दी गई थी.

खंडपीठ के सीनियर जज जस्टिस पलोक बसु ने तत्कालीन चीफ जस्टिस जीवन रेड्डी से इसकी पहल की थी और भारत सरकार से जल्दी जल्दी सारी औपचारिकताएँ पूरी करके उनकी नियुक्ति कर दी थी.

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