उत्तर भारत में बाढ़ की स्थिति गंभीर

  • 21 सितंबर 2010
उत्तराखंड बाढ़
Image caption बलटा बारी गांव में राहत कार्यों में जुटे अधिकारी

पूरे उत्तर भारत में बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए 'नेशनल डिज़ास्टर रेस्पॉन्स फ़ोर्स' के कई दल तीन प्रमुख बाढ़ प्रभावित इलाक़ों की ओर रवाना कर दिए गए हैं.

सेना के हेलिकॉप्टरों को राहत सामान लाने ले जाने के लिए तैयार रहने को कहा गया है. बाढ़ की वजह से सड़कें टूट गईं हैं, इसलिए राहत कार्य में दिक़्कतें आ रही हैं.

उत्तराखंड

उत्तराखंड में पिछले तीन दिनों में बाढ़ की वजह से क़रीब 70 लोगों की जान गई है.

राहत का सामान लेकर दो हेलिकॉप्टर मंगलवार को इसलिए नहीं उड़ पाए क्योंकि मौसम ख़राब था.

देहरादून से बीबीसी को शालिनी जोशी ने बताया कि पिथौड़ागढ़ के गूंजी इलाक़े में कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर निकला 30 से 35 लोगों का एक दल भी फंसा हुआ है.

एक अलग घटना में चमौली ज़िले में ट्रैकिंग पर गए सेना का एक दल ग्लेशियर गिरने से फँस गया. इस घटना में एक लेफ़्टिनेंट कर्नल और एक मेजर की मौत हो गई है.

इस बीच टिहरी बाँध का पानी ख़तरे के निशान से ऊपर बह रहा है.वहीं निचले इलाक़े में बन रहे कोटेश्वर बाँध के बिजली घर में पानी घुस आया है.

सोनिया गाँधी ने मंगलवार को बाढ़ प्रभावित इलाक़ों का दौरा किया.

सोमवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ये घोषणा कर चुके हैं कि बाढ़, बादल फटने और भूस्खलन से मरनेवालों के परिजनों को एक लाख रूपए और घायलों को 50 हज़ार रूपए मुआवज़े के तौर पर दिए जाएँगे.

उत्तर प्रदेश

बीबीसी संवाददाता रामदत्त त्रिपाठी के अनुसार नेपाल और उत्तराखंड में हुई तेज़ बारिश का असर अब उत्तर प्रदेश में दिख रहा है.

Image caption बाढ़ का प्रभाव मनुष्य और मवेशी पर एक समान पड़ा है.

बाढ़ कंट्रोल रूम से मिली सूचना के अनुसार उत्तराखंड, नेपाल और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भारी बारिश और बाँधों से ज़्यादा पानी छोड़े जाने के कारण गंगा, यमुना , राम गंगा, कोसी , शारदा , घाघरा, कुआनों और इनकी सहायक नदियाँ उफान पर हैं.

ये नदियाँ कई जगह ख़तरे के निशान से ऊपर बह रही है.

नदियों में बाढ़ से सैकड़ों गाँव जलमग्न हो गए हैं और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद, रामपुर तथा सहारनपुर में सड़कों पर पानी भरने से यातायात रुक गया है.

मुरादाबाद और रामपुर में एनएच-24 और सहारणपुर में एनएच-73 और एनएच-58 पर बाढ़ की वजह से यातायात प्रभावित हुआ है.

सड़कें टूट गईं हैं और इसकी वजह से राहत कार्य में दिक़्क़तें आ रही हैं.

सहारनपुर , बिजनौर, मुज्जफरनगर, बरेली, रामपुर, मुरादाबाद, मेरठ, मथुरा, आगरा , अलीगढ, , शाहजहांपुर,फरुखाबाद, हरदोई, उन्नाव, सीतापुर, बहराइच, लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, गोंडा,बाराबंकी, फैजाबाद, सिद्धार्थनगर, बस्ती, देवरिया , महराजगंज , आज़मगढ़ , बलिया आदि जिलों में बाढ़ की समस्या गंभीर बतायी गयी है.

अतिवृष्टि और मकान गिरने से कई ज़िलों में लोगों के मरने की भी सुचनाएँ आ रही हैं.

प्रशासन का कहना है कि सहारनपुर में बाढ़ में फँसे लोगों को हेलीकॉप्टर से बाहर निकाला गया है.

सभी प्रभावित ज़िलों में राहत और बचाव के लिए पीएसी के जवान लगाए गए हैं.

सरकार ने ज़िला अधिकारियों को बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और उनके भोजन की व्यवस्था के निर्देश दिए हैं.

बाढ़ से उत्तर प्रदेश के क़रीब 500 गाँव प्रभावित हैं.

बिहार

बिहार में गोपालगंज के बरौली ब्लॉक में 10 गाँव जलमग्न हो गए हैं.

नेपाल ने गंडक नदी में पानी छोड़ा है, जिसकी वजह से सीवान और सारण पर बाढ़ का ख़तरा बढ़ गया है.

मुख्यमंत्री नितिश कुमार बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए राज्य के आला अफ़सरों के साथ बौठक करने के बाद बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण कर चुके हैं.

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