ईरान ने बातचीत के संकेत दिए

  • 23 सितंबर 2010
ईरान के राष्ट्रपति अहमदिनिजाद
Image caption अमरीकी विदेश मंत्रालय का मानना है कि ईरान ने बातचीत के संकेत दिए हैं.

ईरान ने संकेत दिए हैं कि वो अपने परमाणु प्रौद्योगिकी विकास परियोजना के मुद्दे पर अमरीका और पांच विकसित देशों के संगठन पी-5 से बातचीत के लिए तैयार है.

पी-5 देशों में रूस, चीन, फ़्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी शामिल हैं. अमरीका इसके अतिरिक्त देश है. इन देशों का उद्देश्य ईरान के परमाणु परियोजना को सैनिक रूप देने से रोकना है.

गुरुवार को अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन और पी-5 देशों के विदेश मंत्रियों की न्यूयॉर्क में हुई एक बैठक में ईरान से बातचीत दोबारा शुरू करने की नीति पर विचार किया गया. इसकी विस्तार से जानकारी अमरीकी विदेश मंत्रालय के एक उच्च अधिकारी ने ऑफ़ दा रिकॉर्ड ब्रीफ़िंग में दी.

इस बैठक में यूरोपीय संघ की प्रतिनिधि केथी ऐशटन भी उपस्थित थीं जिनकी ज़िम्मेदारी होगी ईरान से दोबारा संपर्क बनाना.

संगठन ने यह भी तय किया कि वे ईरान पर अपनी एकता बनाए रखेंगे.

बातचीत के संकेत

इस अमरीकी अधिकारी ने कहा कि ईरान से ऐसे इशारे मिल रहें हैं कि वो बातचीत के लिए तैयार हैं. ये बातचीत कुछ महीनों में शुरू हो सकती है.

इस संगठन की रणनीति पर बोलते हुए अमरीकी विदेश मंत्रालय के इस अधिकारी ने कहा कि ईरान से किसी समझौते पर पहुँचने के लिए इसके साथ चरणबद्ध रवैया अपनाना अधिक उचित होगा.

लेकिन इन देशों के विदेश मंत्रियों ने यह भी स्वीकार किया कि अमरीका, संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ के ज़रिए ईरान पर लगाए गए आर्थिक और सैनिक प्रतिबंध को पूरी तरह से लागू करना ही काफ़ी नहीं है. उनका कहना था की बातचीत के ज़रिए हल निकालना संगठन का असल मक़सद है.

ईरान के ख़िलाफ़ लगे प्रतिबंध का उस पर बुरा असर पड़ना शुरू हो गया है. हाल में ईरान के पूर्व राष्ट्रपति अकबर हाशमी रफ़संजानी ने ईरानी सरकार को प्रतिबंध को गंभीरता से लेने की सलाह दी है.

फूट डालने की नीति

ईरान ने पिछले साल अक्तूबर में पी-5 और अमरीका देशों से बातचीत शुरू की थी लेकिन बाद में इससे अलग हो गया था.

ईरान अब तक इस संगठन के सदस्यों के बीच फूट डालने में कामयाब रहा था जिसके कारण उस पर प्रतिबंधों का ख़ास असर नहीं हुआ था. लेकिन इस बार संगठन के सभी सदस्यों ने प्रतिबंधों का पालन किया है जिससे ईरान को आर्थिक रूप से चोट पहुंची है.

अमरीका और विकसित देशों का कहना है कि ईरान की परियोजना परमाणु हथियार बनाने के लिए है लेकिन ईरान कहता है वो परमाणु बिजली घर बना रहा है.

ईरान और अमरीका के बीच संबंध कई वर्षो से टूटे हुए हैं.

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने पद संभालने के बाद ईरान से संबंध दोबारा बहाल करने की दावत दी थी लेकिन ईरान का कहना है कि बातचीत का आधार बराबरी और पारस्परिक सम्मान होना चाहिए.

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