अयोध्या विवाद पर फ़ैसला टला

Image caption अयोध्या मामला पिछले क़रीब छह दशक से अदालत में है.

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या के विवादित स्थल के मालिकाना हक़ को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के 24 सितंबर को सुनाए जाने वाले फ़ैसले को टाल दिया है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट के फ़ैसले को टालने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक अपील की गई थी.

इस अपील पर सुनवाई करते हुए आरवी रविंद्रन और एचएल गोखले की आदलत ने कहा कि इससे दोनों पक्षों को मामले को अदालत से बाहर सुलझाने के लिए एक और मौक़ा मिल जाएगा.

सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद अब अयोध्या के विवादित स्थल के मालिकाना हक़ पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ शुक्रवार को अपना फ़ैसला नहीं सुना पाएगी.

हाईकोर्ट का फ़ैसला टालने के लिए रमेशचंद्र त्रिपाठी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी. इसे इस मामले को अदालत से बाहर सुलझाने के एक प्रयास के रूप में देखा जा रहा था.

याचिकाकर्ता के वकील मुकुल रोहतगी ने बताया कि फ़ैसला टालने को लेकर बेंच के दोनों न्यायाधीशों में इस बात पर मतभेद था, इसे देखते हुए अदालत ने परंपरा के मुताबिक़ सभी पक्षों को नोटिस जारी करने का निर्णय लिया.

रोहतगी ने बताया कि कोर्ट ने फ़ैसला सुनाते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच की तीन जजों की विशेष पीठ के सदस्य धर्मवीर शर्मा की इस महीने के अंत में होने वाली रिटायरमेंट को भी ध्यान में रखा गया. इसलिए याचिका पर सुनवाई की तारीख 28 सितंबर तय की गई है.

प्रतिक्रिया

बाबरी एक्शन कमेटी के वकील जफ़रयाब जिलानी ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर कहा है कि हम पिछले साठ साल से इंतज़ार कर रहे हैं तो चार-पांच दिन और इंतज़ार किया जा सकता है.

जिलानी ने कहा, " इस मामले में तीन-तीन प्रधानमंत्रियों ने सुलह करवाने की कोशिश की थी लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला. ऐसे में रमेश चंद्र त्रिपाठी की कोशिश का क्या हल निकल सकता है? "

उन्होंने कहा कि जब दोनों पक्ष ये कह रहे थे कि फ़ैसला आने दिया जाए तो ऐसा ही किया जाना चाहिए था.

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