कश्मीर के समर्थन में नक्सली बंद

Image caption माओवादी सरकार के ख़िलाफ़ अपने संघर्ष में बड़ी संख्या में महिलाओं को भी शामिल करते हैं.

माओवादियों ने 30 सितंबर को कश्मीरी प्रदर्शनकारियों के समर्थन में छह राज्यों में बंद का एलान किया है.

सीपाआई(माओवादी) के केंद्रीय समिति के प्रवक्ता अभय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि ये बंद आंध्रप्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और उड़ीसा में लागू होगा. इसके अलावा महाराष्ट्र के तीन ज़िलों में बंद का आह्वान है.

बयान में कहा गया है कि ये बंद कश्मीर में हुई हिंसा और वहां चल रहे संघर्ष के समर्थन में है.

नक्सलियों ने पहली बार कश्मीर के समर्थन में बंद का आह्वान किया है.

मुठभेड़

उधर पश्चिम बंगाल के झारग्राम ज़िले में माओवादियों के साथ हुई मुठभेड़ में केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ़) का एक जवान मारा गया है.

ये मुठभेड़ राज्य के झारग्राम ज़िले के अंतर्गत आनेवाले बिनपुर पुलिस थाने के गाँव बंदरबनी में शनिवार की सुबह हुई.

बीबीसी से हुई बातचीत में पुलिस प्रमुख पराजित मुखर्जी ने बताया, ''हमारे पास पुख़्ता जानकारी थी कि माओवादी एक अस्थायी कैंप लगा रहे हैं. हम तक पहुँची रिपोर्ट के मुताबिक इस कैंप का इस्तेमाल हमले करने के लिए किया जाना था. इसलिए हमने तय योजना के तहत कैंप पर हमला किया.''

कैंप पर हमला

पुलिस ने कैंप पर शनिवार तड़के हमला किया.

ये हमला रायफ़ल और लाइट मशीन गनों से किया गया.

माओवादियों ने भी जवाबी कार्रवाई की और मुठभेड़ क़रीब पाँच घंटों तक चली.

मुठभेड़ के बाद माओवादी विद्रोही अपने एक मृत साथी को छोड़कर जंगलों की ओर भाग गए.

इस संघर्ष में सुरक्षाबलों की अगुवाई कर रहे सीआरपीएफ़ के डी स्टीफ़ेन की मौत हो गई.

Image caption सवाल ये भी उठ रहे हैं कि क्या माओवादियों के ख़िलाफ़ चल रहे संघर्ष में माओवादियों का पलड़ा भारी है?

डी स्टीफ़ेन मणिपुर के हैं और उनके शव को उनके घर भेजा जा रहा है, जहाँ पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा.

पश्चिम बंगाल के पुलिस प्रमुख ने बताया कि माओवादियों को हटाने के लिए इस क्षेत्र में और सुरक्षाबल तैनात किए जाएँगे.

मुखर्जी ने कहा, ''ये अभियान इसलिए जारी है क्योंकि अगर हम माओवादियों के पीछे नहीं गए तो वो हमारे पीछे आ जाएँगे."

माओवादी हिंसा

पिछले दो सालों में लालगढ़ इलाक़े में माओवादियों ने अपना दबदबा क़ायम कर लिया है. तबसे अब तक माओवादी हिंसा में आदिवासी बहुल पुरुलिया, बाँकुरा और पश्चिमी मिदनापुर के सैकड़ो लोग मारे गए हैं.

इनमें से ज़्यादातर सुरक्षाबल या राज्य के सत्तासीन राजनीतिक दल, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के समर्थक हैं.

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